नेपाल में कई दिनों से जारी हिंसक प्रदर्शनों और अराजकता के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ Gen-Z आंदोलन, जिसने राजधानी काठमांडू से लेकर देश के कई जिलों तक उग्र रूप ले लिया था, अब बातचीत की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, Gen-Z समूह ने सेना के साथ शांति वार्ता के लिए अपना अंतरिम प्रतिनिधि चुन लिया है। इसके लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम नेता के रूप में नियुक्त किया गया है। 10 सितंबर को इस आंदोलन के सदस्यों की वर्चुअल बैठक लगभग चार घंटे तक चली, जिसमें यह निर्णय लिया गया। अब आगे होने वाली सभी वार्ताओं में सुशीला कार्की ही Gen-Z की ओर से बातचीत की कमान संभालेंगी।
सुशीला कार्की, जो नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं, अपनी निष्पक्ष और सख्त छवि के कारण इस कठिन समय में एक उपयुक्त चेहरा मानी जा रही हैं। आंदोलनकारी युवाओं का मानना है कि कार्की का प्रशासनिक और कानूनी अनुभव देश के इस संक्रमणकाल में मार्गदर्शन देने में अहम भूमिका निभा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कार्की ने Gen-Z नेताओं से फोन पर बातचीत के बाद इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया है और अंतरिम सरकार के नेतृत्व का प्रस्ताव भी मान लिया है। उनकी सहमति मिलने के बाद अब आंदोलनकारी सेना प्रमुख अशोक सिग्देल के साथ अगली बैठक का कार्यक्रम तय करने जा रहे हैं।
हालांकि, अभी तक आंदोलनकारियों और सेना के बीच किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि सेना प्रमुख अशोक सिग्देल और Gen-Z के प्रतिनिधियों के बीच पहले ही एक प्रारंभिक मुलाकात हो चुकी है, लेकिन इसमें कोई ठोस मांग या शर्तें सामने नहीं रखी गईं। यह केवल एक शुरुआती संपर्क बैठक थी, ताकि वार्ता की प्रक्रिया को गति दी जा सके। सेना प्रमुख ने संकेत दिया है कि अगर वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो स्थिति को सामान्य करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुशीला कार्की के नेतृत्व में Gen-Z आंदोलन को एक वैध और गंभीर प्रतिनिधित्व मिलेगा, जो सेना और नागरिकों के बीच विश्वास बहाली में मददगार साबित हो सकता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाली बैठकों में क्या आंदोलनकारी और सेना किसी साझा समझौते पर पहुंच पाते हैं या नहीं। नेपाल की जनता, जो लगातार भय और अनिश्चितता में जी रही है, उम्मीद लगाए बैठी है कि यह पहल देश में शांति और स्थिरता बहाल करने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित होगी।
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