कांग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत ‘हाइड्रोजन बम’ कहकर की थी, लेकिन शुरुआत में ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सीधे तौर पर कोई बड़ा खुलासा नहीं है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ‘वोट चोरी’ करवाने में मदद कर रहा है। राहुल गाँधी के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘वोट चोरों’ की रक्षा कर रहे हैं और कांग्रेस के वोटरों के नाम संगठित तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर और कॉल सेंटर की मदद से किया जा रहा है। राहुल गाँधी ने कहा कि कर्नाटक की CID ने पिछले 18 महीनों में चुनाव आयोग को 18 बार पत्र लिखकर सबूत माँगे, लेकिन आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया। उनका कहना था कि यह पूरा ऑपरेशन केंद्रीय स्तर पर सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है। खासकर, वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए कर्नाटक में अन्य राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
Vote chori allegations made by Rahul Gandhi incorrect, baseless: ECI
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— ANI Digital (@ani_digital) September 18, 2025
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग एक हफ्ते के भीतर कर्नाटक CID को सबूत नहीं देता, तो यह माना जाएगा कि वे संविधान की रक्षा नहीं कर रहे, बल्कि ‘वोट चोरों’ को बचा रहे हैं।
हालाँकि, राहुल गाँधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर कहा जा रहा है कि जिस ‘हाइड्रोजन बम’ का दावा उन्होंने किया था, वह पूरी तरह फुस्स साबित हुआ। उनके आरोप नए नहीं थे, क्योंकि पहले भी वे कई बार ‘वोट चोरी’ और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कर्नाटक के आलंद का उदाहरण दिया, जहाँ कथित तौर पर 6,018 वोटरों के नाम हटाए गए। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में भी इसी तरह की गड़बड़ी होने का दावा किया। इसके अलावा राहुल गाँधी ने स्क्रीन पर ‘Who’s Someone’ नाम की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें दो धुंधली छवियाँ थीं। उन्होंने उनका नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से जोड़ा।
अंत में राहुल गाँधी ने कहा कि यह अभी ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं है, असली खुलासा तो टीम से बातचीत के बाद होगा। यानी जिस बड़े धमाके की उम्मीद से उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी जा रही थी, वह बिना किसी ठोस नए सबूत के खत्म हो गई और लोगों को यह सिर्फ एक दोहराए गए आरोपों का सिलसिला लगा।
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