दावा निपटान प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए RBI के नए निर्देश
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों के मृतक परिजनों के लिए दावा निपटान (Claim Settlement) प्रक्रिया को आसान और तेज़ बनाने के लिए नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब मृतक ग्राहक के परिजन बैंक खाते में जमा 15 लाख रुपये तक की राशि के लिए कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत किए बिना ही दावा कर सकते हैं। सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इन निर्देशों को 31 मार्च 2026 तक लागू करना अनिवार्य होगा।
भारतीय रिज़र्व बैंक (बैंकों के मृत ग्राहकों से संबंधित दावों का निपटान) निदेश, 2025
Reserve Bank of India (Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks) Directions, 2025https://t.co/SiXfEDdsjs
— ReserveBankOfIndia (@RBI) September 26, 2025
देरी पर जुर्माना अनिवार्य
यदि बैंक की गलती के कारण जमा संबंधी दावों के निपटान में देरी होती है, तो मृतक के परिजनों को मुआवजे के तौर पर ब्याज दिया जाएगा। यह ब्याज दर बैंक रेट + 4% प्रति वर्ष से कम नहीं होगी।
कानूनी दस्तावेजों की अनिवार्यता खत्म
जिन खातों में नॉमिनेशन या सर्वाइवरशिप क्लॉज मौजूद है, उनमें बैंक अब नॉमिनी या उत्तरजीवी से उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate), लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन या वसीयत का प्रोबेट (Probate of Will) जैसे कानूनी दस्तावेज नहीं मांगेगा। हालांकि, बैंक नॉमिनी को यह स्पष्ट करेगा कि वे यह भुगतान कानूनी वारिसों के ट्रस्टी (trustee) के रूप में प्राप्त कर रहे हैं।
फिक्स्ड डिपॉजिट पर छूट
जमाकर्ता की मृत्यु की स्थिति में, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या टर्म डिपॉजिट को समय से पहले बंद करने की अनुमति दी जाएगी। इस पर कोई पेनल चार्ज (penal charge) नहीं लगेगा, चाहे एफडी लॉक-इन अवधि के भीतर ही क्यों न हो।
लॉकर से जुड़ी नई व्यवस्था
सेफ डिपॉजिट लॉकर (Safe Deposit Locker) और सेफ कस्टडी (Safe Custody) में रखी वस्तुओं के दावों के लिए भी मानक प्रक्रिया तय की गई है। बैंक को सभी आवश्यक दस्तावेज मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के भीतर दावेदारों से संपर्क कर लॉकर की सामग्री की इन्वेंट्री तैयार करने की तारीख तय करनी होगी।
यदि बैंक इस 15 दिन की समय सीमा का पालन नहीं करता है, तो उसे हर दिन की देरी पर दावेदार को 5,000 रुपये प्रतिदिन मुआवजे के रूप में देने होंगे। उदाहरण के लिए, यदि बैंक 15 की बजाय 20 दिन लेता है, तो अतिरिक्त 5 दिन की देरी पर 25,000 रुपये का मुआवजा देना पड़ेगा।
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