राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित शताब्दी समारोह के दौरान विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया स्मृति डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। यह आयोजन संघ की ऐतिहासिक यात्रा, उसके योगदान और समाजसेवा को सम्मानित करने का प्रतीक है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह में राष्ट्र के प्रति संघ के योगदान को नमन करते हुए विशेष स्मारक डाक टिकट एवं सिक्के का लोकार्पण किया।
अनुशासन, सेवा, सांस्कृतिक जागरण और सामाजिक कल्याण के अविचल संकल्प पर आधारित @RSSorg ने… pic.twitter.com/I3wPYysRX0
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 1, 2025
संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। स्वयंसेवक-आधारित इस संगठन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक सेवा के अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसी परंपरा और सेवाभाव को दर्शाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए स्मारक टिकट और सिक्के विशेष महत्व रखते हैं। स्मृति टिकट में 1963 का वह ऐतिहासिक क्षण दर्शाया गया है जब गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों ने अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश की थी। वहीं, सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिह्न और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि अंकित है, जिसके चरणों में स्वयंसेवक समर्पण भाव से नमन करते दिखाई देते हैं। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है जब मुद्रा पर भारत माता की छवि प्रदर्शित हुई है। सिक्के पर संघ का बोधवाक्य भी अंकित है – “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम।”
#WATCH | Delhi | At the centenary celebrations of RSS, PM Narendra Modi says, "… This Rs 100 coin has the National Emblem on one side, and on the other side, there is an image of Bharat Mata, seated on a lion in 'varad mudra', and swayamsevaks bowing down before her with… https://t.co/eU86ewN4sW pic.twitter.com/Bu1E48gBu7
— ANI (@ANI) October 1, 2025
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ को मुख्य धारा में आने से रोकने के अनेक प्रयास किए गए। पूज्य गुरुजी (एम.एस. गोलवलकर) पर झूठे आरोप लगाए गए, उन्हें जेल भेजा गया, लेकिन वे बाहर आकर भी सहजता से समाज को जोड़ते रहे। प्रधानमंत्री ने गुरुजी के उस कथन का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था – “कभी-कभी जीभ दाँतों के नीचे दब जाती है, कुचल जाती है, लेकिन हम दाँत नहीं तोड़ते, क्योंकि जीभ भी हमारी है और दाँत भी हमारे।”
पीएम मोदी ने बताया कि चाहे संघ पर प्रतिबंध लगे हों या षड्यंत्र किए गए हों, स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया। उनका विश्वास सदैव लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में रहा। यही कारण था कि आपातकाल जैसे कठिन समय में भी संघ के स्वयंसेवक आगे बढ़े और संगठन को समाज का व्यापक समर्थन मिलता गया। आज संघ एक विराट वटवृक्ष की तरह खड़ा है, जिसकी छाया में अनगिनत सेवाकार्य पल्लवित हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन को विजयादशमी और नवरात्रि के संदर्भ से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विजयादशमी अन्याय पर न्याय की, असत्य पर सत्य की और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। ऐसे पावन पर्व पर ही 100 वर्ष पहले संघ की स्थापना हुई थी, जो किसी संयोग से नहीं बल्कि हजारों वर्षों की राष्ट्रचेतना के पुनरुत्थान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि यह हमारी पीढ़ी के स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि हम संघ के शताब्दी वर्ष जैसे ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्का इस अवसर को चिरस्थायी बनाने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति संघ के योगदान का स्मरण भी कराते रहेंगे।
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