अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में साइबर सुरक्षा और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर अपनी चिंता व्यक्त की है। मुंबई स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में आयोजित साइबर जागरूकता माह 2025 के उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने अपनी 13 वर्षीय बेटी नितारा से जुड़ी एक गंभीर घटना साझा की। अक्षय ने बताया कि कुछ महीने पहले नितारा एक ऑनलाइन वीडियो गेम खेल रही थी, जिसमें खिलाड़ी अजनबियों के साथ इंटरैक्ट कर सकते थे। खेल के दौरान किसी अजनबी खिलाड़ी ने नितारा से सवाल पूछा कि वह पुरुष है या महिला। नितारा ने जवाब दिया कि वह महिला है, जिसके तुरंत बाद उसी अजनबी ने बेहद आपत्तिजनक संदेश भेजा और कहा, “क्या आप मुझे अपनी न्यूड तस्वीर भेज सकती हैं?” इस संदेश ने नितारा को बहुत डरा दिया और उसने तुरंत गेम बंद कर दिया। बाद में उसने अपनी माँ को यह पूरी घटना बताई। अक्षय ने इस घटना को साइबर अपराध की शुरुआती चेतावनी के रूप में बताया और कहा कि आजकल साइबर अपराध सड़क पर होने वाले अपराधों से भी अधिक खतरनाक और बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।
#WATCH | मुंबई | अभिनेता अक्षय कुमार ने कहा, "मैं आप सभी को एक छोटी सी घटना बताना चाहता हूँ जो कुछ महीने पहले मेरे घर पर हुई।
मेरी बेटी एक वीडियो गेम खेल रही थी, और कुछ वीडियो गेम ऐसे होते हैं जिनमें आप किसी के साथ खेल सकते हैं।
आप एक अज्ञात अजनबी के साथ खेल रहे होते हैं।… pic.twitter.com/3xheVJ77qQ
— One India News (@oneindianewscom) October 3, 2025
इस घटना को उदाहरण बनाकर अक्षय कुमार ने महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री से एक अहम मांग की। उन्होंने अनुरोध किया कि सातवीं से दसवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए हर सप्ताह एक ‘साइबर पीरियड’ रखा जाए, जिसमें बच्चों को साइबर अपराधों, ऑनलाइन धोखाधड़ी, अश्लील सामग्री और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में शिक्षित किया जाए। उनका कहना था कि इस तरह के पाठ्यक्रम से बच्चे सुरक्षित रहेंगे और ऑनलाइन खतरों के प्रति सतर्क होंगे। अक्षय ने जोर देकर कहा कि बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और उन्हें जागरूक करना अब किसी विकल्प की तरह नहीं, बल्कि आवश्यकता बन गई है, ताकि भविष्य में वे साइबर अपराधों से खुद को बचा सकें और इंटरनेट का उपयोग सुरक्षित रूप से कर सकें। इस पूरे अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि साइबर सुरक्षा केवल वयस्कों का मुद्दा नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है, और इसके लिए स्कूलों में विशेष पाठ्यक्रम और नियमित जागरूकता कार्यक्रम लागू करना अनिवार्य है।
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