बिहार चुनाव के नतीजों के बाद लालू परिवार में कलह और अधिक तीव्र हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक तौर पर परिवार और पार्टी दोनों से दूरी बना ली है और अब वह अन्य सदस्यों पर तीखे आरोप लगा रही हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रोहिणी का एक नवा वीडियो सामने आया है, जिसमें उनका गला बैठा हुआ है और वे फोन पर किसी बिहार के पत्रकार से बात कर रही हैं। बातचीत में उन्होंने कहा है कि, जब किडनी दान की बात आई थी, तो उनका बेटा (लालू परिवार का कोई सदस्य) भाग गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग लालू के नाम पर कुछ करना चाहते हैं, वे अपनी किडनी गरीबों को दान करने के लिए आगे आएँ।
अपने पोस्ट में रोहिणी ने लिखा है कि “हॉस्पिटल्स में जूझ रहे उन लाखों-करोड़ों गरीबों को अपनी किडनी देने की जिम्मेदारी उन लोगों की है, जो लालू के नाम पर राजनीति करते हैं।” उन्होंने यह भी तंज कसा कि जो लोग उनकी किडनी को “गंदा” बताते हैं, उन्हें पहले गरीबों को किडनी दान करने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने ट्रोलर्स और आलोचकों पर तीखा हमला किया, यह कहकर कि बहुत से लोग “एक बोतल खून देने के नाम पर” दूसरों को उपदेश देते हैं, परंतु अपनी किडनी दान करने की हिम्मत नहीं दिखाते।
रोहिणी ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान की थी, जिसके बाद उन्हें “किडनी देने वाली बेटी” के नाम से जाना गया। इससे पहले वह अपनी राजनीतिक सक्रियता और पारिवारिक समर्थन में खुलकर सामने आई थीं, खासकर अपने भाई तेज प्रताप यादव के पक्ष में।
लेकिन हाल ही में, 16 नवंबर 2025 को, उन्होंने एक भावुक पोस्ट के जरिए राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की और अपने परिवार से अपना नाता तोड़ने का ऐलान किया। इस कदम ने लालू परिवार की आंतरिक कलह को और गहराई दी है, जो पहले से ही तेज प्रताप के अलगाव के बाद सुर्खियों में रही है।
रोहिणी का यह राजनैतिक मोड़ यह दर्शाता है कि लालू परिवार में केवल सत्ता की लड़ाई ही नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत और नैतिक सवाल भी गहरे तौर पर उभर कर सामने आ रहे हैं — “दान”, “वास्तविकता” और “पारिवारिक प्रतिबद्धता” के मद्देनज़र उनका ये कदम राजनीतिक और भावनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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