इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी तनाव के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहाँ हिज़्बुल्लाह के चीफ ऑफ स्टाफ हायथम अली तबताबाई एक ड्रोन-आधारित हवाई हमले में मारे गए। यह हमला लेबनान की राजधानी बेरूत में किया गया। हिज़्बुल्लाह ने आधिकारिक बयान जारी कर उनकी मौत की पुष्टि कर दी है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस स्ट्राइक में कुल पाँच लोगों की मौत हुई है, हालांकि सभी मृतकों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है।
हायथम अली तबताबाई लंबे समय से इजरायल की निगरानी में था। इजरायल का दावा था कि तबताबाई की अगुवाई में हिज्बुल्लाह सीजफायर के बावजूद फिर से हथियारों का भंडारण और मिसाइल सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहा था। इसी खतरे को देखते हुए यह हमला “हाई-प्रिसीजन ऑपरेशन” के तौर पर किया गया। यह पिछले एक साल में सबसे टारगेटेड सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।
अमेरिका ने 2016 में तबताबाई को अपनी मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट सूची में शामिल किया था और उस पर 50 लाख डॉलर (करीब ₹45 करोड़) का इनाम घोषित किया गया था। वह हिज्बुल्लाह की सैन्य रणनीति का केंद्रीय चेहरा था और उसे संगठन के सबसे अनुभवी कमांडरों में गिना जाता था।
2023-24 के लेबनान-इजरायल युद्ध में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के कई वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाया था, लेकिन तबताबाई उस समय बच निकलने में सफल रहा था। माना जा रहा था कि पिछले कुछ महीनों में वह फिर से संगठन को सैन्य रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रहा था, जो इस हमले की बड़ी वजह बनी।
तबताबाई 1980 के दशक में हिज्बुल्लाह से जुड़ा था। उसने ईरान समर्थित सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया और सीरिया-यमन में कई लड़ाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसे हिज्बुल्लाह की दूसरी पीढ़ी का सबसे प्रभावशाली और खतरनाक नेता माना जाता था।
उसकी मौत को इजरायल की बड़ी सैन्य सफलता माना जा रहा है और विश्लेषकों का मानना है कि इससे हिज्बुल्लाह की सैन्य संरचना को बड़ा झटका लगेगा। हालांकि, इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
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