लोकसभा में 3 दिसंबर 2025 को समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के बयान ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर बोलते हुए नदवी ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे संविधान के आर्टिकल 25 और 26 को खत्म कर दिया गया है और देश में मुसलमानों की जिंदगी लगातार तंग होती जा रही है। उनका दावा था कि लगभग 70 प्रतिशत वक्फ संपत्तियों का अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, जिससे समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्ला नदवी देश में “दोबारा जिहाद” की धमकी दे रहे हैं
“पहला जिहाद” मोहम्मद बिन क़ासिम से लेकर औरंगज़ेब तक हज़ार साल का दौर बताया जाता है pic.twitter.com/LODVEIjL6z
— ANUPAM MISHRA (@scribe9104) December 4, 2025
अपने भाषण के दौरान नदवी ने मौलाना अरशद मदनी के उस विवादित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें अन्याय और जुल्म के खिलाफ लड़ाई और जिहाद का जिक्र था। नदवी ने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे दिखाई देते हैं कि समुदाय को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए नई लड़ाई लड़नी पड़ सकती है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने भी चर्चा की।
उनके इन बयानों पर सदन में बैठे सत्ताधारी दल के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा सांसदों ने इसे भड़काऊ और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि संसद में ‘जिहाद’ जैसे शब्दों का उपयोग समाज में गलत संदेश भेजता है और अनावश्यक तनाव को बढ़ावा देता है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
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