अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आने वाले सामान पर 50 फीसदी तक भारी टैक्स लगाए जाने का अब अमेरिका में ही विरोध शुरू हो गया है। अमेरिका के तीन डेमोक्रेटिक सांसदों ने इन टैरिफ के खिलाफ संसद में एक प्रस्ताव पेश किया है। सांसदों का कहना है कि जिस राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर यह टैक्स लगाया गया था, उसे खत्म किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक ये शुल्क न सिर्फ गलत हैं, बल्कि कानून के भी खिलाफ हैं।
सांसदों ने दलील दी कि इन टैरिफ की वजह से अमेरिका में आम लोगों के लिए रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं। इसके साथ ही भारत जैसे अहम मित्र देश के साथ अमेरिका के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उनका कहना है कि भारत अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार है और ऐसे फैसले दोनों देशों के बीच सहयोग को कमजोर करते हैं।
डेमोक्रेटिक सांसद डेबोरा रॉस ने इन टैरिफ का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों ने नॉर्थ कैरोलिना में बड़े पैमाने पर निवेश किया है और हजारों लोगों को रोजगार दिया है। उनके अनुसार, ये शुल्क उस मजबूत आर्थिक साझेदारी को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी फायदा हुआ है।
Three US House of Representatives members introduce resolution to end Trump's 50% tariffs on India
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— ANI Digital (@ani_digital) December 13, 2025
वहीं सांसद मार्क वीजी ने कहा कि ये गैर-कानूनी शुल्क नॉर्थ टेक्सास के आम नागरिकों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अमेरिका का एक बेहद जरूरी दोस्त और आर्थिक साझेदार है, ऐसे में उस पर लगाए गए टैरिफ अमेरिका के हित में नहीं हैं।
सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने चेतावनी दी कि ये शुल्क बाजार की सप्लाई चेन को बाधित कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी ग्राहकों को सीधा नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि टैरिफ हटाने से ही अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक और सुरक्षा संबंध और मजबूत हो सकते हैं।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर कुल 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया था। इसके लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया गया। यह टैरिफ एक साथ नहीं, बल्कि दो चरणों में लगाया गया।
पहला 25 फीसदी शुल्क 1 अगस्त 2025 को लगाया गया, जिसे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ कहा गया। इसके बाद 27 अगस्त 2025 को अतिरिक्त 25 फीसदी का ‘सेकेंडरी टैरिफ’ जोड़ा गया। इस दूसरे शुल्क का कारण यह बताया गया कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क था कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से मॉस्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए आर्थिक मदद मिलती है, इसलिए यह कदम जरूरी था। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे भारत-अमेरिका संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ा है।
इससे पहले भी कई अमेरिकी सांसद ट्रंप को पत्र लिखकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस तरह के टैरिफ भारत को चीन और रूस के और करीब धकेल सकते हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए ठीक नहीं होगा। सांसदों ने इस फैसले को ‘बिना सोचे-समझे की गई गलती’ बताते हुए भारत के साथ तुरंत बातचीत शुरू करने की अपील की थी।
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