महाराष्ट्र और अरुणाचल प्रदेश में हुए निकाय चुनावों में भाजपा ने शानदार और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इन नतीजों ने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं तक में जबरदस्त उत्साह भर दिया है। महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया है, वहीं अरुणाचल प्रदेश में भी निकाय चुनावों में पार्टी का दबदबा साफ नजर आया है।
महाराष्ट्र की बात करें तो 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनावों में महायुति ने जोरदार जीत हासिल की। अकेले भाजपा ने 3,325 सीटें जीतकर कुल पार्षदों का करीब 48 प्रतिशत अपने नाम किया। इतना ही नहीं, नगर परिषद अध्यक्षों के पदों पर भी महायुति का वर्चस्व रहा, जहां लगभग 75 प्रतिशत अध्यक्ष पद महायुति के खाते में गए। इनमें भाजपा के 129 मेयर शामिल हैं, जो पार्टी की मजबूत शहरी पकड़ को दर्शाता है।
भाजपा की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि 2017 के निकाय चुनावों में पार्टी को 1,602 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार उसने दोगुनी से भी ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है। खास बात यह रही कि भाजपा को ग्रामीण इलाकों में भी व्यापक समर्थन मिला। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद कम आबादी वाले गांवों में प्रचार किया और कहा कि 2014 के बाद भाजपा एक शहरी केंद्रित पार्टी से निकलकर ग्रामीण महाराष्ट्र में भी गहरी जड़ें जमा चुकी है।
मैं महाराष्ट्र की जनता का बहुत आभारी हूँ कि उन्होंने राज्य में नगर पालिका और नगर पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और महायुति को प्रचंड सफलता दिलाई। यह सफलता हमारे कार्यकर्ताओं की है, यह उनकी जीत है।
महाराष्ट्र की जनता ने एक बार फिर मा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के… pic.twitter.com/lcR4nyh1LF
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) December 21, 2025
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस जीत का श्रेय विकास आधारित राजनीति को दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने किसी व्यक्ति, नेता या पार्टी पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए, बल्कि केवल विकास, पिछली उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर जनता से समर्थन मांगा। उनके अनुसार, भारतीय राजनीति में यह एक दुर्लभ उदाहरण है, जहां बिना आलोचना और नकारात्मकता के चुनाव लड़कर इतनी बड़ी जीत हासिल हुई।
अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा ने निकाय चुनावों में अपना दबदबा बनाए रखा। राज्य में जिला परिषद और ग्राम पंचायत की अधिकांश सीटों पर पार्टी ने जीत दर्ज की। कुल 245 सीटों में से भाजपा ने 170 सीटें जीतीं, जिनमें 59 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इससे साफ है कि पार्टी की पकड़ सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी मजबूत है।
Grateful to the people of Arunachal Pradesh for their overwhelming support and faith in the Bharatiya Janata Party.
My heartfelt thanks to our dedicated party karyakartas at every level for their tireless efforts and commitment, which made this historic victory possible.… pic.twitter.com/xL1FMtNpyH
— Pema Khandu པདྨ་མཁའ་འགྲོ་། (@PemaKhanduBJP) December 21, 2025
ग्रामीण स्तर पर भाजपा की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायत की 8,208 सीटों में से पार्टी ने 6,085 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं ईटानगर नगर निगम के चुनावों में भी भाजपा सबसे आगे रही और 20 में से 14 वार्डों में जीत दर्ज की। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस शानदार प्रदर्शन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत” और “विकसित अरुणाचल” के विजन को दिया और कहा कि यह नतीजे जनता के मजबूत समर्थन को दर्शाते हैं।
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