वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर स्कूली छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को स्मरण किया। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साहिबजादों के बलिदान को नमन किया और मुगल शासन के दौरान भारत पर हुए अत्याचारों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि वीर साहिबजादों का त्याग भारत के इतिहास में साहस, सत्य और धर्म की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी, विशेषकर Gen Z, को विकसित भारत की मजबूत नींव बताते हुए उनसे देश के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान मैकाले ने भारत में गुलामी की मानसिकता का बीज बोया था, जिसके प्रभाव स्वतंत्रता के बाद भी दशकों तक दिखाई देते रहे। उन्होंने कहा, “देश की आज़ादी के बाद भी लंबे समय तक हमारी सच्ची वीर गाथाओं और बलिदानों को दबाने की कोशिश की गई। लेकिन अब भारत ने तय कर लिया है कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पानी ही होगी। अब भारतीयों का बलिदान और शौर्य दबाया नहीं जाएगा और देश के नायक-नायिकाओं को हाशिए पर नहीं रखा जाएगा।”
Addressing a programme on Veer Baal Diwas. We remember the exemplary courage and sacrifice of the Sahibzades.
https://t.co/kQPb0RmaIj
— Narendra Modi (@narendramodi) December 26, 2025
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मैकाले द्वारा रची गई साजिश का लक्ष्य वर्ष 2035 था, लेकिन अब वह समय सिर्फ दस वर्षों में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि इन दस वर्षों में भारत पूरी तरह गुलामी की मानसिकता से मुक्त होगा। “140 करोड़ देशवासियों का यह संकल्प होना चाहिए कि जैसे-जैसे हम इस मानसिकता से मुक्त होंगे, वैसे-वैसे स्वदेशी पर गर्व और आत्मनिर्भरता की भावना और मजबूत होगी,” उन्होंने कहा।
वीर बाल दिवस के महत्व को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वे वीर साहिबजादे, जिन्होंने बहुत छोटी उम्र में अपने साहस और संकल्प से मजहबी कट्टरता और आतंक के अस्तित्व को चुनौती दी, आज भी हमें प्रेरणा देते हैं। साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह को कम उम्र में उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा।”
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई किसी सत्ता की नहीं, बल्कि भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच थी। यह संघर्ष सत्य और असत्य का था, जिसमें एक ओर दशम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी खड़े थे और दूसरी ओर क्रूर मुगल शासक औरंगजेब की सत्ता थी। उन्होंने कहा कि साहिबजादे भले ही उम्र में छोटे थे, लेकिन उनकी आस्था और साहस अडिग था।
पीएम मोदी ने कहा कि औरंगजेब यह मानता था कि भारतवासियों को डराकर उनका धर्मांतरण किया जा सकता है और इसके लिए उनके मनोबल को तोड़ना जरूरी था। इसी सोच के तहत साहिबजादों को निशाना बनाया गया। हालांकि, मुगलिया सत्ता यह भूल गई थी कि गुरु गोविंद सिंह जी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे और उनके साहिबजादों को वही वीरता और अटूट साहस विरासत में मिला था।
उन्होंने कहा कि चाहे पूरी मुगलिया बादशाही उनके पीछे पड़ गई हो, लेकिन किसी भी साहिबजादे को अपने धर्म और सत्य के मार्ग से डिगा नहीं पाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर बाल दिवस देश को यह याद दिलाता है कि भारत की आत्मा कभी पराजित नहीं हुई और न ही कभी होगी।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel