अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की हालिया छापेमारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक स्थानीय पादरी ने ICE एजेंट्स पर खुले तौर पर नस्लभेद का आरोप लगाया है। पादरी का दावा है कि एजेंट्स ने उनके चेहरे पर बंदूक तान दी, हथकड़ी लगाकर SUV में बंद किया और बाद में सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वे गोरे हैं।
पादरी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब एक दिन पहले ही मिनियापोलिस में ICE की कार्रवाई के दौरान 37 वर्षीय महिला की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद शहर में विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं और ICE की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है।
पादरी ने एक टीवी एंकर को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने ICE एजेंट्स को एक हिस्पैनिक दिखने वाली युवती को घेरते हुए देखा। पादरी के अनुसार, उन्होंने एजेंट से कहा, “उसे छोड़ो, मुझे पकड़ लो।” इसके बाद एक एजेंट उनके बेहद करीब आया, उनके चेहरे पर बंदूक तान दी और बार-बार पूछा, “क्या अब तुम डरे हो?” पादरी ने कहा कि उन्होंने साफ जवाब दिया कि वे डरने वाले नहीं हैं। इसके बाद एजेंट्स ने उन्हें हथकड़ी लगाकर SUV के पीछे डाल दिया।
भारत का व्यापार समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया, अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक का दावा।
“मैंने समझौता तैयार किया था, लेकिन मोदी ने फोन नहीं किया भारत इससे असहज था,” लुटनिक ने कहा।
एक और सबूत कि भारत ने झुकने… pic.twitter.com/3XLJgj5DCV
— One India News (@oneindianewscom) January 9, 2026
पादरी का दावा है कि वाहन के अंदर उनसे तीन बार पूछा गया कि क्या वे डर गए हैं। तीसरी बार जब उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है, तो एजेंट्स ने उनका पहचान पत्र और मोबाइल फोन माँगा। इसके बाद कथित तौर पर एजेंट्स ने कहा, “तुम गोरे हो, तुम्हारे साथ मजा नहीं आएगा,” और उन्हें छोड़ दिया।
इस घटना से एक दिन पहले ICE की कार्रवाई के दौरान एक 37 वर्षीय महिला की गोली लगने से मौत हो गई थी। अधिकारियों का कहना है कि यह फायरिंग आत्मरक्षा में की गई, क्योंकि महिला कथित तौर पर एजेंट को अपनी गाड़ी से कुचलने की कोशिश कर रही थी।
हालाँकि, मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे समेत कई स्थानीय नेताओं ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे “बकवास कहानी” बताया है। महिला की मौत के बाद मिनियापोलिस की सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ICE नस्लीय आधार पर कार्रवाई कर रहा है और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने ICE एजेंट का बचाव किया है। ट्रंप ने इस मामले के लिए ‘रेडिकल लेफ्ट’ को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पीड़िता ने एजेंट पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की थी। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन और डेमोक्रेटिक नेताओं का रुख सख्त बना हुआ है। मेयर जैकब फ्रे ने तो ICE एजेंट्स से राज्य छोड़ने तक की बात कह दी है।
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