बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं को सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार किया है। सरकार के कार्यालय की ओर से जारी बयान में पुलिस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच अल्पसंख्यकों से जुड़ी कुल 645 घटनाएँ सामने आईं, जिनमें से केवल 71 मामलों को सांप्रदायिक कारणों से जुड़ा माना गया।
हालाँकि, इसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 में बांग्लादेश में करीब 3000 से 3500 लोग हिंसा का शिकार हुए। सरकार के इस आंकड़े ने खुद उसके दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर घटनाओं की संख्या सीमित बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मौतों का आंकड़ा कहीं अधिक बताया गया है, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो रहा है।
अंतरिम सरकार का कहना है कि 2025 में देश में हुए अधिकांश अपराध नॉन-कम्युनल और कॉमन क्राइम की श्रेणी में आते हैं और उनका धर्म या संप्रदाय से कोई सीधा संबंध नहीं है। सरकार के अनुसार हर हिंसक घटना चिंता का विषय है, लेकिन आंकड़े यह दिखाते हैं कि ज्यादातर मामलों में सांप्रदायिक कोण नहीं था।
On Incidents Affecting Minority Communities and the Broader Law and Order Situation in Bangladesh (January–December 2025)
DHAKA, January 19: Bangladesh remains committed to confronting crime with transparency, accuracy, and resolve. A yearlong review of official police records…
— Chief Adviser of the Government of Bangladesh (@ChiefAdviserGoB) January 19, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, सालभर में 38 मंदिरों में तोड़फोड़, 8 आगजनी, 1 हत्या और 1 चोरी की घटना दर्ज की गई। इसके अलावा मूर्तियों को नुकसान पहुँचाने की धमकी और सोशल मीडिया पर पूजा स्थलों को नुकसान पहुँचाने की धमकियों के 23 मामले सामने आए। इनमें से लगभग 50 मामलों में केस दर्ज किए गए और करीब 50 लोगों की गिरफ्तारी हुई। सरकार का दावा है कि 574 मामलों का धर्म से कोई लेना-देना नहीं था।
अंतरिम सरकार ने अपराधों के अन्य कारणों का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते एक साल में भूमि विवाद के 23, चोरी के 106, पुरानी रंजिश के 26, रेप के 58 और अस्वाभाविक मौत के 172 मामले सामने आए। इनमें से लगभग 390 मामलों में पुलिस ने केस दर्ज किए।
सरकार के इन दावों पर बांग्लादेश के अल्पसंख्यक संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने सवाल उठाया है कि अगर ये घटनाएँ सांप्रदायिक नहीं थीं, तो कानून अपने हाथ में लेने वाले लोग कौन थे। संगठन का कहना है कि सरकार के ऐसे बयान सांप्रदायिक ताकतों को मजबूत करते हैं।
एकता परिषद ने यह भी दावा किया है कि जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। संगठन का आरोप है कि हिंसा की प्रकृति को कम करके दिखाना जमीनी सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा है और इससे अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना और गहरी हो रही है।