दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर हिंसा और हंगामे का केंद्र बन गई। गुरुवार, 26 फरवरी को वामपंथी छात्र संगठन JNUSU ने शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने का प्रयास किया, जो पुलिस के साथ खूनी झड़प में बदल गया।
इस झड़प में दिल्ली पुलिस ने 51 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिनमें छात्र संघ के 4 पदाधिकारी शामिल हैं। वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस ने छात्रों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और चोट पहुँचाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की।
#WATCH | Delhi | JNU Student Union continue their protest, demanding UGC regulations to be implemented. Delhi Police have set up barricades to contain the students inside the campus.
They had given a call for a long march from the campus to the Ministry of Education, but were… pic.twitter.com/hBmU0KN04u
— ANI (@ANI) February 26, 2026
पुलिस का कहना है कि छात्रों को पहले ही बताया गया था कि कैंपस के बाहर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद लगभग 400-500 छात्र इकट्ठा हुए और जबरन मार्च निकालने लगे। पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ने पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और पुलिसकर्मियों पर डंडे, बैनर और जूते फेंके, साथ ही कुछ छात्रों ने पुलिस को काटने (Biting) की कोशिश भी की।
#WATCH | Delhi | DCP South West district, Amit Goel, says, "Today, JNUSU called for a protest. A long march from the JNU campus, Sabarmati Tea Point, to the Ministry of Education. Yesterday, they were tried to reason with that they should conduct any protests inside the campus,… pic.twitter.com/jtQPRA54TR
— ANI (@ANI) February 26, 2026
JNU प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ ‘विक्टिम कार्ड’ खेलकर अपनी हिंसा और अनुशासनहीनता को छिपाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासन ने यह भी कहा कि कैंपस में तोड़फोड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
वामपंथी छात्र संगठन ने पुलिस पर बदसलूकी और डॉ. अंबेडकर की तस्वीर के अपमान का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
इस तरह के लगातार हंगामों और राजनीति के चलते, JNU की साख और करदाताओं के पैसे पर सवाल उठ रहे हैं।
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