सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक चौंकाने वाले दावे—कि 3000 से ज्यादा यूक्रेनी घुसपैठिए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में घुस आए हैं—को भारत सरकार ने पूरी तरह फर्जी बताया है। Press Information Bureau (PIB) ने साफ किया है कि यह खबर महज अफवाह है और इसका कोई आधार नहीं है।
सरकारी एजेंसियों के अनुसार, 3000 विदेशी नागरिकों के छिपे होने की बात गलत है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध गतिविधियों में शामिल 7 विदेशी नागरिकों को जरूर गिरफ्तार किया है।
क्या था वायरल दावा?
सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अमेरिकी भाड़े के सैनिकों की मदद से 3000 यूक्रेनी भारत में घुस आए हैं और पूर्वोत्तर में विद्रोहियों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे हैं। PIB फैक्ट चेक ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
Some social media posts are claiming that over 3,000 Ukrainians have entered India and are hiding in the North-East to train insurgent groups, allegedly backed by US mercenaries and supplying cheap drones to terrorists.#PIBFactCheck
❌These claims are #FAKE.
🔸 7 individuals… pic.twitter.com/WVbQwVkodI
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) March 20, 2026
NIA की कार्रवाई और सच्चाई
National Investigation Agency (NIA) की जांच में सामने आया कि कुल 7 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया है, जिनमें 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी शामिल हैं। इन पर मिजोरम के रास्ते म्यांमार में अवैध रूप से प्रवेश करने की कोशिश का आरोप है।
गिरफ्तार लोगों में अमेरिकी नागरिक Matthew Aaron VanDyke का नाम प्रमुख है, जो खुद को ‘Sons of Liberty International’ का संस्थापक और सुरक्षा विश्लेषक बताता है। इसके अलावा हुर्बा पेट्रो और स्लीवियाक तारास सहित अन्य यूक्रेनी नागरिकों को भी हिरासत में लिया गया है।
इन सभी को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट से उस समय पकड़ा गया जब वे भारत को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे थे।
जांच में क्या सामने आया?
NIA की FIR के अनुसार, यह एक सोची-समझी साजिश थी। आरोपी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और बिना आवश्यक अनुमति (RAP/PAP) के पूर्वोत्तर के संवेदनशील इलाकों में पहुंचे।
बताया जा रहा है कि ये लोग म्यांमार के विद्रोही गुटों (EAGs) को ड्रोन वॉरफेयर और जैमिंग तकनीक की ट्रेनिंग देने जा रहे थे। ये गुट भारत विरोधी संगठनों से भी जुड़े हुए हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था।
अदालत ने सभी 7 आरोपियों को 11 दिनों की NIA रिमांड पर भेज दिया है।
सरकार की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक खबरों को साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
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