‘वंदे मातरम’ के गायन को अनिवार्य किए जाने संबंधी केंद्र सरकार के सर्कुलर के खिलाफ दाखिल याचिका को Supreme Court of India ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे “प्रीमैच्योर” बताते हुए कहा कि फिलहाल इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस Joymalya Bagchi ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या सरकारी अधिसूचना में ऐसा कोई प्रावधान है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ न गाने पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वकील की दलील
याचिकाकर्ता के वकील Sanjay Hegde ने दलील दी कि भले ही कानूनी तौर पर कोई प्रतिबंध न हो, लेकिन सामाजिक दबाव के जरिए लोगों को इसे गाने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
केंद्र का पक्ष
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए किसी एडवाइजरी की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान CJI Surya Kant ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर में “may” (सकते हैं) शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह अनिवार्य नहीं बल्कि एक सलाह है।
दंडात्मक कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं
कोर्ट ने कहा कि इस सर्कुलर में किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है और न ही किसी को ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
‘भेदभाव हो तो कोर्ट आएं’
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि इस एडवाइजरी के आधार पर किसी के साथ भेदभाव होता है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि फिलहाल आशंकाएं अस्पष्ट हैं और बिना ठोस आधार के याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।
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