कनाडा की संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस ने एक महत्वपूर्ण विधेयक Bill C-9 (Combating Hate Act) को पारित कर दिया है। 25 मार्च 2026 को तीसरी रीडिंग में पास हुआ यह बिल अब आगे की मंजूरी के लिए सीनेट ऑफ कनाडा के पास भेजा गया है।
यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है, लेकिन इसे देश में बढ़ते हेट क्राइम और कट्टरपंथी गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
आतंकवादी प्रतीकों पर सख्ती
इस बिल का सबसे अहम प्रावधान यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर आतंकवादी संगठनों से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल कर किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना अपराध माना जाएगा।
इसका सीधा असर बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे संगठनों पर पड़ेगा, जिन्हें पहले से ही कनाडा में आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। अब इनके झंडे या प्रचार सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
एयर इंडिया फ्लाइट 182 हमले से जुड़ा संदर्भ
इन संगठनों का नाम एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम विस्फोट जैसे बड़े आतंकी हमले से जुड़ा रहा है, जिसमें 329 लोगों की जान गई थी।
धार्मिक और सामुदायिक स्थलों की सुरक्षा
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी समुदाय के धार्मिक स्थल, स्कूल या सांस्कृतिक केंद्रों तक पहुंच रोकना, डराना या बाधा डालना अलग अपराध माना जाएगा।
यह कदम उन घटनाओं के बाद उठाया गया है, जिनमें गुरुद्वारों, हिंदू मंदिरों और अन्य संस्थानों के बाहर विरोध, तोड़फोड़ और धमकियों की शिकायतें सामने आई थीं।
इंडो-कनाडाई समुदाय की प्रतिक्रिया
इंडो-कनाडाई समुदाय ने इस बिल का स्वागत किया है और इसे बड़ी राहत बताया है। उनका मानना है कि इससे लंबे समय से जारी डर और धमकी के माहौल पर अंकुश लगेगा।
हालांकि, समुदाय ने यह भी मांग की है कि भारतीय दूतावासों और कूटनीतिक परिसरों को ‘प्रोटेस्ट बबल’ के तहत विशेष सुरक्षा दी जाए।
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