पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हिंसा के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। NIA ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी शुरुआती रिपोर्ट में इस घटना को सुनियोजित साजिश बताया है।
सोमवार (06 अप्रैल 2026) को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए 12 FIR की जांच NIA को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एजेंसी जरूरत पड़ने पर नई FIR दर्ज कर सकती है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए NIA को जिम्मेदारी देना जरूरी है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- सभी 12 FIR की जांच NIA करेगी
- जांच के दौरान नए तथ्य सामने आने पर अतिरिक्त केस दर्ज किए जा सकते हैं
- समय-समय पर कोर्ट को स्टेटस रिपोर्ट दी जाएगी
NIA DECODES THE BENGAL "IN-SIR-GENCY"
BREAKING:
1/NIA submits explosive preliminary report to Supreme Court on Malda judicial gherao.
2/ 72-hour probe flags a coordinated escalation targeting the judiciary.
3/ Trigger: Protests against Special Intensive Revision (SIR) of…
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) April 6, 2026
क्या है पूरा मामला?
01 अप्रैल 2026 को मालदा के कालियाचक क्षेत्र में सात न्यायिक अधिकारियों को भीड़ ने घेर लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन अधिकारियों को 9 से 13 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया।
यह घटना उस समय हुई जब मतदाता सूची के SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा था। हालात इतने बिगड़ गए कि एक महिला न्यायिक अधिकारी को घंटों सड़क पर रोका गया और प्रशासन की टीम पर हमला किया गया।
NIA रिपोर्ट में बड़े खुलासे
NIA की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- घटना पूरी तरह पहले से प्लान की गई थी
- करीब 1500 लोगों की भीड़ जुटाई गई
- भीड़ को ई-रिक्शा और स्थानीय नेटवर्क से संगठित किया गया
- न्यायिक अधिकारियों के काफिले पर सुनियोजित पथराव किया गया
- हमले में एस्कॉर्ट वाहन चालक गंभीर रूप से घायल हुआ
महिलाओं को आगे कर बनाया गया ढाल
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भीड़ के आगे महिलाओं को खड़ा किया गया और पीछे पुरुषों को तैनात किया गया।
इस रणनीति के कारण पुलिस और प्रशासन के लिए कार्रवाई करना कठिन हो गया, जिससे हालात और बिगड़ते चले गए।
सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक
घटना के दौरान सुरक्षा में भी गंभीर लापरवाही सामने आई:
- कुल 16 में से 9 CCTV कैमरे खराब थे
- मुख्य गेट का कैमरा भी काम नहीं कर रहा था
- भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे
आरोपियों का प्रोफाइल
- कुल 432 लोगों की पहचान की गई
- 24 आरोपितों को उपद्रवी तत्व के रूप में चिन्हित किया गया
- इनमें से 5 का आपराधिक इतिहास बताया गया है
व्यापक असर
मालदा की यह घटना न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अब इस मामले की जांच आगे बढ़ेगी, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel