पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनीं सालुमारादा थिम्मक्का का शुक्रवार (14 नवंबर 2025) दोपहर 114 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें 2 नवंबर को सांस संबंधी दिक्कतों के बाद बेंगलुरु के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि इलाज के बावजूद उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः कई अंगों के काम करना बंद कर देने के कारण उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शनिवार (15 नवंबर 2025) को ज्ञानभारती परिसर में किया जाएगा।
थिम्मक्का अपने पर्यावरण प्रेम और अद्भुत योगदान के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती थीं। 1950 के दशक में अपने पति चिकाैया के साथ उन्होंने बेंगलुरु साउथ जिले की सड़कों के किनारे 5 किलोमीटर तक लगभग 400 बरगद के पेड़ लगाए और वर्षों तक उनकी देखभाल की। बिना किसी औपचारिक शिक्षा और सरकारी मदद के उन्होंने वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण को ही अपना जीवन बना लिया। यही कारण है कि उन्हें ‘पर्यावरण की देवी’ कहा जाता था।
थिम्मक्का को उनके कार्यों के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले, जिनमें पद्मश्री (2019), नाडोजा अवार्ड (2010) और इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार (1997) शामिल हैं। उनके योगदान ने देश-विदेश के लाखों लोगों को प्रेरित किया।
In Andhra Pradesh, we saw those who swore to protect environment ruthlessly cut down trees, destroyed forests and enabled the smuggling of our vital ecological resources for selfish gain. And then, on the other end of the spectrum, we have a humble person whose life was a total… pic.twitter.com/9NoR3DsNFA
— Pawan Kalyan (@PawanKalyan) November 14, 2025
जनसेना प्रमुख पवन कल्याण ने भी थिम्मक्का को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “आंध्र प्रदेश में, पर्यावरण की रक्षा का दावा करने वाले ही पेड़ों की बेरहमी से कटाई और जंगलों का विनाश करते रहे, जबकि थिम्मक्का जैसी विनम्र हस्ती ने अपना जीवन प्रकृति को समर्पित कर दिया।” पवन कल्याण ने भावपूर्ण शब्दों में बताया कि बच्चे न होने की पीड़ा को उन्होंने हरियाली से भरने का मार्ग अपनाया और 375 बरगद तथा 8,000 से अधिक पेड़ लगाए।
उन्होंने कहा कि 114 वर्ष की आयु में दुनिया से विदा लेने वाली थिम्मक्का का जीवन सत्ता या धन के लिए नहीं था, बल्कि धरती माता के प्रति उनके अटूट प्रेम का प्रतीक था। पवन कल्याण ने कहा कि उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनकी आत्मा हमें पर्यावरण बचाने तथा पेड़ लगाने के लिए हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
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