असम सरकार ने अवैध घुसपैठियों से निपटने के लिए कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को गुवाहाटी में हुई कैबिनेट बैठक के बाद घोषणा की कि अब संदिग्ध घुसपैठियों को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सिर्फ 10 दिन का समय मिलेगा। अगर इस अवधि में वे प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो जिला प्रशासन सीधे डिपोर्टेशन का आदेश जारी करेगा। सरमा ने बताया कि अब तक 30,128 घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजा जा चुका है।
बैठक में 1950 के Immigrants (Expulsion from Assam) Act के तहत नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने को मंजूरी दी गई। इसके तहत स्थानीय प्रशासन और जिला आयुक्त को अदालत में गए बिना सीधे कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “अब हमें हर बार न्यायाधिकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। जिला प्रशासन घुसपैठियों की पहचान कर तुरंत निष्कासन का आदेश जारी कर सकता है।”
ASSAM HAS PUSHED BACK 30,000+ ILLEGAL IMMIGRANTS TILL DATE pic.twitter.com/QhBxe1fTF1
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) September 9, 2025
नए SOP के अनुसार, संदिग्ध पाए जाने पर व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए 10 दिन दिए जाएंगे। समयसीमा खत्म होने पर जिला प्रशासन 24 घंटे के भीतर डिपोर्टेशन का आदेश देगा। इसके बाद ऐसे लोगों को या तो होल्डिंग सेंटर भेजा जाएगा या सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद से सीधे देश से बाहर किया जाएगा। यह प्रणाली अब विदेशी न्यायाधिकरणों (Foreigners’ Tribunals) को दरकिनार कर दी गई है। सरमा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि न्यायाधिकरणों में लंबित 82,000 से अधिक मामलों से निपटने के लिए यह SOP निर्णायक बदलाव लाएगा।
अब प्रशासन संदिग्ध घुसपैठियों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करने के लिए 10 दिन की अवधि देगा।
Today Assam has issued a detailed Standard Operation Procedure to detect and deport illegals pic.twitter.com/hL5yMPaLv1
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) September 9, 2025
कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि सभी चिन्हित व्यक्तियों का बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय विवरण Foreigners Identification Portal पर दर्ज किया जाएगा। वहीं, अगर कोई व्यक्ति सीमा पार करते समय पकड़ा जाता है और उसे 12 घंटे के भीतर रोका जाता है, तो उसे बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के तुरंत वापस भेजा जा सकेगा।
यह SOP सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के अक्टूबर 2024 के उस फैसले के बाद लागू किया गया है, जिसमें कहा गया था कि असम सरकार को 1950 के कानून का उपयोग करने की पूरी स्वतंत्रता है। इस निर्णय को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकीय संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए अहम और निर्णायक कदम माना जा रहा है।