असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार, 21 जुलाई 2025 को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि राज्य की करीब 29 लाख बीघा जमीन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों और बंगाली मुस्लिमों ने अवैध कब्जा कर रखा है। उन्होंने यह बात दरंग जिले के गोरुखुटी में गोरुखुटी बहुउद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगाँठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने बताया कि 2021 में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य में ज़मीन खाली कराने का बड़ा अभियान शुरू किया गया, लेकिन इस प्रयास को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव डाला गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत अब तक 1.29 लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इसमें केवल दरंग जिले में ही 77,420 बीघा जमीन से कब्जा हटाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि अब यह अभियान अन्य ज़िलों जैसे बोरसोल्ला, लुमडिंग, बुरहापहाड़, पाभा, बतद्रा, चापर और पैकन तक फैलाया गया है। सरकार इस मुक्त कराई गई ज़मीन का उपयोग जंगल और जनहित परियोजनाओं के लिए कर रही है।
In the last 4 years, we have freed over 42,000 acres of land from encroachers and dedicated it to public use. pic.twitter.com/AaWDKMcNTK
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 21, 2025
मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी कहा कि यदि कोई सोचता है कि दो-तीन अभियानों के बाद सरकार पीछे हट जाएगी, तो वह भ्रम में है। उन्होंने असम आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि 1983-85 के दौर में हार की भावना के कारण कई लोगों ने कांग्रेस के सामने समर्पण कर दिया था, जिससे राज्य की राजनीति की दिशा बदल गई। उन्होंने यह भी कहा कि “कभी हम शंकर-माधव कहते थे, लेकिन अब शंकर-अजान बोलने लगे हैं। अजान पीर अपनी जगह हैं, लेकिन माधवदेव का भी स्थान है – तभी हमारी ‘जाति’ बच सकती है।” यह बयान असम की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान की ओर संकेत करता है।
सरमा सरकार का बेदखली अभियान हाल ही में गोलपाड़ा जिले में भी देखा गया, जहाँ 1,038 बीघा (लगभग 140 हेक्टेयर) वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। गोलपाड़ा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर तेजस मारिस्वामी के मुताबिक, इस ज़मीन पर 1,080 परिवार बसे थे, जिनमें अधिकतर बंगाली मूल के मुसलमान थे। यहाँ 36 बुलडोजर लगाए गए और इलाके को 6 ब्लॉकों में बाँटकर 2,500 से अधिक संरचनाओं (घर और दुकानें) को गिराया गया। इस दौरान 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और वन अधिकारियों को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया था।
इस पूरे अभियान को लेकर असम और पश्चिम बंगाल की सरकारों के बीच टकराव भी देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम सरकार पर बंगालियों के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाया और इसे बीजेपी का “विभाजनकारी एजेंडा” करार दिया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई घुसपैठियों और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ है, न कि बंगाली समुदाय के खिलाफ। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस पुराने बयान का भी हवाला दिया, जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठ को बाहरी आक्रमण बताया गया था।
मुख्यमंत्री सरमा के इस रुख से स्पष्ट है कि असम सरकार राज्य की जनसंख्या संरचना (Demography) को सुरक्षित रखने के लिए आक्रामक अभियान चला रही है और इसपर किसी भी तरह का राजनीतिक या बाहरी दबाव स्वीकार करने के मूड में नहीं है।