असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने राज्य में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। गोलाघाट जिले के रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट और उरियमघाट क्षेत्र में 11,000 बीघा (लगभग 3,600 एकड़) वन भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए 29 जुलाई 2025 से बड़ा बेदखली अभियान चलाया गया है। यह क्षेत्र असम और नागालैंड की सीमा पर स्थित है और पारिस्थितिकीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
बेदखली अभियान की प्रमुख बातें:
- लगभग 2,000 अवैध घुसपैठिए परिवारों ने रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर कब्जा कर रखा था।
- वन विभाग और गोलाघाट जिला प्रशासन ने 2648 अवैध घरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की।
- 12 गाँवों – जैसे कि सोनारीबिल टॉप, विद्यापुर बाजार, दयालपुर, मधुपुर, राजापुखुरी आदि – को चिह्नित किया गया है।
- इन इलाकों में सुपारी की खेती के लिए जंगल साफ किए गए थे, जिससे पर्यावरण और क्षेत्र की जैव विविधता को खतरा उत्पन्न हो गया था।
अतिक्रमण हटाने से पहले की प्रक्रिया:
- प्रशासन ने 1,500 परिवारों को 7 दिन का नोटिस दिया था।
- इनमें से 80% परिवारों ने स्वेच्छा से घर खाली कर दिए।
- लगभग 500 परिवारों के पास फॉरेस्ट राइट्स कमेटी (FRC) से प्रमाणपत्र हैं और वे कानूनी रूप से अधिकृत हैं, जिनमें बोडो, नेपाली और अन्य जनजातीय समुदाय शामिल हैं।
स्थानीयों की प्रतिक्रिया:
स्थानीय लोगों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों में अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं, जो बिना किसी कानूनी अधिकार के फॉरेस्ट एरिया में रह रहे थे और जंगल की भूमि पर कब्जा कर खेती कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह अवैध जनसंख्या विस्तार असम की सांस्कृतिक और पारिस्थितिकीय पहचान के लिए खतरा बनता जा रहा है।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी:
- बेदखली अभियान के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों और वन विभाग के कर्मियों की तैनाती की गई।
- अधिकारियों ने बताया कि संपूर्ण अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन सतर्क है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बयान:
सीएम हिमंता ने 21 जुलाई 2025 को बयान में कहा था:
“पिछले 4 वर्षों में असम में 1.29 लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है। हालांकि, अब भी 29 लाख बीघा भूमि अतिक्रमण के कब्जे में है। सरकार का संकल्प है कि इस भूमि को वापस लेकर राज्य की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत की रक्षा की जाएगी।”
असम सरकार का यह अभियान केवल अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान, और पर्यावरण संरक्षण का एक संयोजित प्रयास है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई में चलाया जा रहा यह व्यापक अभियान अवैध कब्जे और घुसपैठ के विरुद्ध राज्य की नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
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