असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और ब्रह्मपुत्र समेत उसकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर ने गंभीर बाढ़ संकट पैदा कर दिया है। राज्य के कई जिलों में हजारों घर पानी में डूब गए हैं, जबकि सड़क और रेल संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई ग्रामीण इलाकों का जिला मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
23 जुलाई 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है और 6.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि अलग-अलग समय पर जारी बुलेटिनों में प्रभावित जिलों, गाँवों और आबादी के आँकड़े तेजी से बदल रहे हैं। कई इलाकों में पानी बढ़ने के कारण प्रशासन को लगातार नए राहत शिविर खोलने पड़ रहे हैं।
ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा
लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी कई सहायक नदियाँ उफान पर हैं। निचले इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में घर, कृषि भूमि और स्थानीय सड़कें जलमग्न हो गई हैं।
कई स्थानों पर पुलों और सड़कों को नुकसान पहुँचा है। रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। जिन गाँवों का सड़क संपर्क समाप्त हो गया है, वहाँ नावों के माध्यम से भोजन, पेयजल, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सामग्री पहुँचाई जा रही है।
Reviewed the flood situation yesterday in the worst affected areas.
Our Govt stands with the people in this difficult time and we will help them rebuild their lives, standing by them as a member of their family. pic.twitter.com/S9LmoM4Yxa
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 23, 2026
सेना, NDRF और SDRF ने संभाला मोर्चा
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राज्य सरकार, भारतीय सेना, असम राइफल्स, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF और राज्य आपदा मोचन बल यानी SDRF की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
नावों और विशेष बचाव उपकरणों की सहायता से गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना को भी आवश्यकता पड़ने पर हवाई राहत अभियान के लिए तैयार रखा गया है।
लगातार बारिश, तेज बहाव और कई इलाकों में संपर्क टूटने के कारण बचाव दलों को अभियान चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राहत शिविरों में पहुँचाए जा रहे प्रभावित लोग
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। यहाँ विस्थापित परिवारों को भोजन, साफ पेयजल, दवाइयाँ, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री और अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सक्रिय किया गया है। प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाने और दवाइयों का पर्याप्त भंडार रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मृतकों के परिवारों को ₹4 लाख की सहायता
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि राहत और बचाव अभियान में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना, राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना और संपर्कविहीन क्षेत्रों तक राहत सामग्री पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इन जिलों में स्थिति गंभीर
असम के गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, कामरूप, होजाई, नलबाड़ी, धुबरी और कोकराझार समेत कई जिलों में बाढ़ का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।
कई क्षेत्रों में खेत पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। पशुधन को बचाने और मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने की भी चुनौती बनी हुई है।
IMD ने भारी बारिश की चेतावनी दी
भारतीय मौसम विभाग ने असम और मेघालय क्षेत्र में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। IMD के पूर्वानुमान के अनुसार कई इलाकों में भारी वर्षा जारी रह सकती है, जिससे नदियों का जलस्तर और बढ़ने तथा नए क्षेत्रों में बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने की अपील की है। नागरिकों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार बारिश से और बिगड़ सकते हैं हालात
असम में बाढ़ की स्थिति पहले ही गंभीर बनी हुई है। ऐसे में यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहती है तो निचले इलाकों में पानी और बढ़ सकता है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बचाव टीमें तैनात की जा रही हैं।
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