ऐसा था शिबू सोरेन का शुरुआती सफर और राजनीतिक सफर
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को बिहार के हजारीबाग (अब झारखंड) में हुआ था। लोग उन्हें ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से जानते थे। उनके पिता सोबरन मांझी आदिवासी समुदाय से थे और पढ़े-लिखे होने के साथ-साथ अपने समुदाय के लिए लगातार आवाज उठाते थे। समाज के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उनकी हत्या कर दी गई। उस समय कॉलेज में पढ़ रहे शिबू सोरेन ने पिता की मौत के बाद आदिवासी समुदाय को एकजुट करने की शुरुआत की, और यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा की नींव रखी गई।

आदिवासियों के हक के लिए समर्पित नेता
साल 1972 में शिबू सोरेन ने अपने साथियों के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। उन्होंने 1977 में पहली बार चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 1980 में उनकी जीत का सफर शुरू हुआ और उन्होंने दुमका लोकसभा सीट से सात बार सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया।
शिबू सोरेन का सपना था कि आदिवासियों के लिए अलग राज्य बने। उन्होंने झारखंड को बिहार से अलग करने के लिए लंबा आंदोलन चलाया और अपनी पूरी राजनीति इसी लक्ष्य को समर्पित कर दी। उनकी राजनीतिक इच्छाशक्ति और संघर्ष का ही परिणाम था कि अंततः झारखंड राज्य का गठन संभव हो पाया।
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