डेढ़ महीने तक थाने और एसपी ऑफिस के चक्कर काटती रही मां, बेटी की सड़ी-गली लाश मिली
बिहार के वैशाली जिले के पीरापुर गांव से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बीए की छात्रा संजना भारती, जो डेढ़ महीने पहले कॉलेज से एडमिट कार्ड लेने निकली थी, लापता हो गई थी। घर नहीं लौटने पर उसके परिजन थाने और एसपी ऑफिस के चक्कर काटते रहे, लेकिन किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी।
अब एक खेत के गड्ढे से उसका सड़ा-गला शव मिला है, और जब तक पुलिस हरकत में आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह एक मां की बदहवासी और सिस्टम की बेशर्मी की कहानी है, जिसमें एक बेटी की जान गई, और न्याय की पुकारें अनसुनी रह गईं।
पीड़ित परिवार भगवानपुर और गोरौल थानों में जाता रहा, लेकिन दोनों एक-दूसरे के क्षेत्र में मामला होने का हवाला देकर टालते रहे। संजना की मां ने कोर्ट से FIR का आदेश लाकर थाने में दिया, तब जाकर मामला दर्ज हुआ — लेकिन तब तक संजना की लाश बदबू मारने लगी थी।
कैसे मिली संजना की लाश
पीरापुर गांव के खेत में एक किसान ने सिंचाई के दौरान गड्ढे से तेज दुर्गंध महसूस की। पुलिस और ग्रामीणों को बुलाया गया। जब गड्ढा खोदा गया तो संजना का शव और एक बैग मिला, जिसमें उसका आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम और कॉलेज के कागजात थे। इन्हीं दस्तावेजों से पहचान हुई। शव घर से महज एक किलोमीटर दूर मिला।
परिवार के आरोप
संजना की मां का आरोप है कि गांव के ही युवक रूपेश कुमार ने उसकी बेटी का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे धमकाया था। रूपेश और उसके साथियों के खिलाफ पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत भी बुलाई गई थी, जहां एक शिक्षक ने संजना की मां से कहा था, “बेटी को पढ़ाने की क्या जरूरत है?”
इस दर्दनाक घटना के बाद जिले के एसपी ने खुद घटनास्थल का मुआयना किया और भगवानपुर थाना प्रभारी सहित कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
सवाल उठता है कि अगर पुलिस ने शिकायत पर शुरुआत से कार्रवाई की होती, तो क्या संजना की जान बच सकती थी? यह केस बिहार के थानों में व्याप्त लापरवाही, संवेदनहीनता और भ्रष्ट तंत्र की गवाही देता है — जहां एक मां की पुकारें तब तक नहीं सुनी जातीं, जब तक उसकी बेटी लाश बनकर वापस नहीं आती।