केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) को बढ़ावा देने के लिए ₹37,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई है।
सरकार का उद्देश्य वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को घरेलू स्तर पर पूरा किया जा सके और आयात पर निर्भरता कम हो सके।
कोयला गैसीकरण से क्या होगा फायदा?
इस योजना के तहत सतह के पास उपलब्ध कोयला और लिग्नाइट से सिंथेटिक गैस तैयार की जाएगी। इस गैस का उपयोग कई महत्वपूर्ण उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा, जैसे—
- LNG (Liquefied Natural Gas)
- यूरिया
- अमोनिया
- मेथनॉल
फिलहाल भारत इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
निवेश और रोजगार के बड़े अवसर
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को संयंत्र और मशीनरी लागत का 20% तक वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- एक परियोजना को अधिकतम ₹5,000 करोड़ तक की सहायता
- कुल ₹2.5 से ₹3 लाख करोड़ तक निवेश की संभावना
- करीब 50,000 नए रोजगार (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) सृजित होने का अनुमान
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती
सरकार का मानना है कि इस योजना से—
- ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी
- आयात बिल में भारी कमी आएगी
- देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
- “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को नई गति मिलेगी
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