अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखा। गुरुवार सुबह प्री-ओपनिंग सेशन में बीएसई सेंसेक्स 415 अंक की मजबूती के साथ 83,108 पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 50 भी 110 अंक की बढ़त लेकर 25,441 पर खुला। इससे पहले बुधवार को भी बाजार तेजी में बंद हुआ था, जब सेंसेक्स 313 अंक बढ़कर 82,693 पर और निफ्टी 91 अंक की मजबूती के साथ 25,330 पर बंद हुआ था। पिछले 11 ट्रेडिंग सेशंस में निफ्टी 10 बार हरे निशान पर बंद हुआ है और यह अपने ऑल टाइम हाई से सिर्फ 3.6 प्रतिशत नीचे है। इस बढ़त के पीछे अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और घरेलू स्तर पर जीएसटी दरों में राहत जैसे फैक्टर अहम रहे हैं।
फेडरल रिजर्व ने इस साल पहली बार ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है, जिससे अब दरें 4 से 4.25 प्रतिशत के बीच आ गई हैं। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने कहा कि यह कदम वैश्विक आर्थिक रिस्क को संभालने के लिए उठाया गया है, हालांकि अभी आक्रामक कटौती की जरूरत नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि 2025 में दो और कटौतियां संभव हैं। अमेरिकी ब्याज दर कम होने से डॉलर और ट्रेजरी यील्ड पर दबाव आता है और इसका फायदा भारत जैसे उभरते बाजारों को मिलता है, क्योंकि विदेशी निवेशक ऐसे समय ज्यादा निवेश करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि फेड की इस पहल और जीएसटी रेट कटौती से महंगाई में कुछ राहत मिलेगी। इसका असर भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले पर भी पड़ सकता है। संभावना जताई जा रही है कि अक्टूबर 2025 में आरबीआई भी ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्ज सस्ता होगा और इससे बाजार को और मजबूती मिल सकती है।
वैश्विक बाजारों में भी मिलेजुले संकेत देखने को मिले। अमेरिका में डाउ जोंस 260 अंक चढ़ा, लेकिन एसएंडपी 500 और नैस्डैक मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 0.6 प्रतिशत ऊपर जाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.43 प्रतिशत बढ़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.57 प्रतिशत गिरा।
कमोडिटी और करेंसी मार्केट में भी हलचल रही। कच्चे तेल की कीमतें लगभग स्थिर रहीं, जबकि सोना डॉलर की रिकवरी के कारण नीचे आ गया। डॉलर पहले 3.5 साल के निचले स्तर तक गिरा था लेकिन बाद में संभल गया।
कुल मिलाकर, फेड रेट कट के बाद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती आई है। विदेशी निवेशकों के बढ़ते रुझान और आने वाले महीनों में संभावित आरबीआई दर कटौती से बाजार को और सहारा मिल सकता है।
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