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One India News > News > Chhattisgarh > नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई, 80 दिन में 100+ निपटाए
Chhattisgarh

नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई, 80 दिन में 100+ निपटाए

गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2024 में 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना में भी आत्मसमर्पण किया है। यह सिलसिला 2025 में भी जारी है। 2025 में अब तक सुरक्षाबलों के सामने 104 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

Last updated: 2025/03/21 at 12:14 PM
One India News Team
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देश को 2026 तक नक्सलमुक्त करने की तरफ सुरक्षाबलों ने एक और कदम बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ में 2 अलग-अलग जगह पर 30 नक्सली मार गिराए गए हैं। यह 2025 में तीसरा ऐसा बड़ा एनकाउंटर है, जिसमें 1 दर्जन या उससे अधिक नक्सली मारे गए हैं। इस बीच कई बड़े नक्सली कमांडर या तो मारे गए हैं, या फिर उन्होंने सरेंडर का रास्ता अपनाया है।

Contents
बीजापुर-कांकेर में 30 ढेर2025 में 119 नक्सली ठिकाने लगाए2024 में मारे थे नक्सली 290सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं, आत्मसमर्पण पर भी जोर10% जिलों में सिमटे नक्सली2026 तक सफाए का लक्ष्य

बीजापुर-कांकेर में 30 ढेर

छतीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में गुरुवार (20 मार्च, 2025) को नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। बीजापुर में सुरक्षाबलों के साथ लम्बी मुठभेड़ में 26 नक्सली मार गिराए गए। इस ऑपरेशन के दौरान 1 जवान भी बलिदान हो गया। यह ऑपरेशन बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा पर चलाया गया था।

नक्सलियों के गंगालूर थाना क्षेत्र में होने की सूचना सुरक्षाबलों को मिली थी। इसके बाद CRPF, पुलिस और DRG के जवान बुधवार को भेजे गए थे। वह गुरुवार सुबह जब यहाँ के पहाड़ी इलाके में पहुँचे तो नक्सलियों ने उन पर फायरिंग कर दी। इसका सुरक्षाबलों ने जवाब दिया। यह मुठभेड़ सुबह 7 बजे चालू हुई और शाम तक चली।

इसके बाद जब फायरिंग रुकी तो सर्च अभियान चलाया गया। इसमें 26 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। इनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं। भारी गोलीबारी में DRG जवान राजू ओयाम घायल हो गए और जब तक उन्हें इलाज के लिए ले जाया जाता, तब वह वीरगति को प्राप्त हुए। ।

इस ऑपरेशन के साथ महाराष्ट्र सीमा से लगे कांकेर में भी मुठभेड़ हुई। यहाँ भी नक्सलियों ने BSF की एक सर्च पार्टी पर फायरिंग की। जवानों ने इसका जवाब दिया। इस ऑपरेशन में 4 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। यहाँ जवानों को हथियारों का जखीरा मिला है।

2025 में 119 नक्सली ठिकाने लगाए

वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक तीन ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 119 नक्सली मार गिराए गए हैं।

2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।

21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।

इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।

सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।

2024 में मारे थे नक्सली 290

वर्ष 2024 भी नक्सलियों के लिए कुछ अच्छा नहीं गया था। इस दौरान 290 नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। इनमें से 239 नक्सली छतीसगढ़ में मारे गए थे। 2024 में भी 4 ऐसे बड़े ऑपरेशन हुए थे, जिनमें एक दर्जन अधिक नक्सली मारे गए थे।

इसमें सबसे बड़ा ऑपरेशन 4 अक्टूबर, 2024 को हुआ था। 4 अक्टूबर, 2024 को दंतेवाड़ा के थुलथुली में 38 नक्सलियों का सफाया एक ही ऑपरेशन में हो गया था। 16 अप्रैल, 2024 को हुए एक ऑपरेशन में भी 29 नक्सली मारे गए थे। रिपोर्ट बताती हैं कि 2024 के भीतर 100 से अधिक एनकाउंटर हुए थे। इनमें ₹9 करोड़ से अधिक के इनामी नक्सली खत्म किए गए थे।

सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं, आत्मसमर्पण पर भी जोर

सुरक्षाबल नक्सलियों का सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं कर रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सलियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर वह हिंसा का रास्ता छोड़ते हैं तो उन्हें सरकार सारा समर्थन देगी लेकिन हथियार उठाने पर उनके पास कोई रास्ता नहीं होगा।

गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2024 में 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना में भी आत्मसमर्पण किया है। यह सिलसिला 2025 में भी जारी है। 2025 में अब तक सुरक्षाबलों के सामने 104 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

जंगल में ठिकाने ना बना पाने के चलते नक्सली गिरफ्तार भी हो रहे हैं। वर्ष 2024 में 1090 में नक्सली गिरफ्तार किए गए थे। 2025 में 104 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके खिलाफ अब कार्रवाई चल रही है।

‘नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए।

मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की…

— Amit Shah (@AmitShah) March 20, 2025

10% जिलों में सिमटे नक्सली

लगातार एनकाउंटर, आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के चलते नक्सली अंतिम साँसे गिन रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है। 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तो 126 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। अब यह संख्या लगभग 90% घट चुकी है। वर्तमान में मात्र 12 जिले ही नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं। इनमें से भी कई जिले आंशिक रूप से ही प्रभावित हैं।

वहीं हिंसा की घटनाएँ भी आधी हो चुकी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की कुल 16,463 घटनाएँ हुई थीं, जबकि मोदी सरकार में 2014 हिंसक घटनाओं की संख्या 53% घटकर 7744 हो गई। नक्सली हमलों में जान गँवाने वाले सुरक्षाबलों और नागरिकों की संख्या में भी मोदी सरकार में गिरावट हुई है।

2004-2014 के बीच देश में अलग-अलग नक्सली हमलों में 1851 जवानों की वीरगति हुई थी। इसी दौरान दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए एक हमले में 76 जवानों को जान गँवानी पड़ी थी। 2011 में झीरम घाटी में हुए एक हमले में राज्य के कॉन्ग्रेस नेतृत्व को नक्सलियों ने मार दिया था। इस हमले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ला भी मारे गए थे।

2014 के बाद से नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की संख्या एक तिहाई से भी कम हो चुकी है। 2014 से 2024 के बीच 509 जवान हमलों में मारे गए हैं। इस दौरान नागरिकों की मौतों में भी कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच 4700 से अधिक नागरिकों को जान गँवानी पड़ी थी। 2014 के बाद से यह संख्या लगभग 1400 हो चुकी है।

2026 तक सफाए का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि अब नक्सलवाद ज्यादा दिन देश में नहीं चल सकता। गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को टारगेट दिया है कि वह 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलमुक्त कर दें। इसी कड़ी में यह बड़े ऑपरेशन और गिरफ्तारियाँ चल रही हैं।

बीजापुर और कांकेर के ऑपरेशन के बाद भी गृह मंत्री ने यही बात दोहराई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट में कहा, “नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए।”

आगे उन्होंने लिखा, “मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है।”

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