छत्तीसगढ़ के कई शहरों और गाँवों में मिशनरियों ने अब धर्मांतरण का नया तरीका अपना लिया है। महिला प्रचारक यानी ‘लेडी मिशनरी’ अपनी असली पहचान छिपाकर काम कर रही हैं। ये महिलाएँ बीमारियों, परेशानियों या अंधविश्वास से जूझ रहीं महिलाओं से पहले दोस्ती करती हैं, उनका भरोसा जीतती हैं और फिर उन्हें ‘चंगाई सभा’ (प्रार्थना सभा) में शामिल होने के लिए प्रेरित करती हैं।
जाँच में खुलासा
कोरबा और जांजगीर जिलों में की गई जाँच में सामने आया कि ‘चंगाई सभा’ के नाम पर बड़े पैमाने पर महिलाओं और बच्चियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। धर्म परिवर्तन के बाद महिलाएँ नन नहीं बनतीं, बल्कि अपने पुराने नाम और पहचान के साथ ही समाज में रहकर गुप्त रूप से धर्म प्रचार करती हैं।
अंधविश्वासी औरतों को दोस्ती करके फँसाओ, फिर लालच देकर बनाओ ईसाई
रायपुर में ‘लेडी मिशनरियों’ ने बदला धर्मांतरण कराने का तरीका
पादरी कहता है- ‘मरे लोगों को भी कर दूँगा जिंदा’#Raipur #Missionaries #Conversion #Chhattisgarh
[ Raipur, Missionaries, Conversion, Pastor,… pic.twitter.com/fRmbwYUbhE
— One India News (@oneindianewscom) October 16, 2025
इन मिशनरियों का निशाना मुख्य रूप से मजदूर और गरीब वर्ग की महिलाएँ हैं। वे उनके दुख-दर्द सुनती हैं और प्रार्थना के ज़रिए राहत का वादा करती हैं। फिर उन्हें चर्च ले जाकर आवेदन भरवाया जाता है, जिसमें हर रविवार प्रार्थना करने का वचन लिया जाता है। कहा जाता है कि नियमित रूप से चर्च आने से प्रभु उनकी बीमारी और परेशानियाँ दूर करेंगे। बीमार या परेशान महिलाएँ राहत की उम्मीद में चर्च जाने लगती हैं। इलाज तो एलोपैथिक दवाओं से किया जाता है, लेकिन इसे ‘प्रभु की कृपा’ बताया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90% महिलाएँ धर्म बदल लेती हैं, जबकि 10% तब लौट जाती हैं जब उन्हें कोई लाभ नहीं दिखता।
बच्चियों पर फोकस
मिशनरियाँ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं हैं। तीन साल से लेकर 13-14 साल तक की बच्चियों को पढ़ाई के नाम पर चर्च के छात्रावासों में रखा जाता है। वहाँ उन्हें न केवल शिक्षा दी जाती है, बल्कि धर्म प्रचार की ट्रेनिंग भी दी जाती है। हर रविवार वे बाइबल के वचन याद करके चर्च में लोगों को सुनाती हैं।
पादरी का विवादित दावा
कोरबा जिले के कोथारी गाँव के पास्टर बाबूलाल मिरी का कहना है कि वे ‘परमेश्वर की कृपा’ से हर रोग, जादू-टोना और परेशानी का इलाज कर सकते हैं। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि प्रार्थना से मरे हुए इंसान को भी जिंदा किया जा सकता है। उनके घर के पास ही एक बड़ा चर्च बना है, जिसे उन्होंने भक्तों द्वारा निर्मित बताया।
गुप्त प्रचार का नेटवर्क
पहंदा और भोजपुर जैसे इलाकों में भी मकानों या खेतों में छोटे चर्च चल रहे हैं, जहाँ हर रविवार बड़ी संख्या में महिलाएँ पहुँचती हैं। उन्हें ‘पवित्र जल’ पिलाकर हर समस्या से मुक्ति का वादा किया जाता है। अब धर्म बदलने वालों से नाम या सरनेम बदलने के लिए नहीं कहा जाता, ताकि वे सरकारी रिकॉर्ड में हिंदू ही दिखें और आरक्षण जैसी सुविधाएँ जारी रहें। कई पास्टर भी अब हिंदू नामों से ही प्रचार कार्य कर रहे हैं।
सरकार का सख्त रुख
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सख्त कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही एक नया कानून लाएगी, जो अब तक के सभी धर्मांतरण विरोधी कानूनों से एक कदम आगे होगा। शर्मा ने कहा, “चंगाई सभा जैसे आयोजन, जिनका इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जाता है, उन्हें रोका जाना चाहिए। नए कानून में इस तरह की सभाओं पर रोक लगाने के विशेष प्रावधान जोड़े जाएंगे।”