बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन के लिए विदेशी खिलाड़ियों की सैलरी पर सख्त कैप लगाने का फैसला किया है। नए नियम के तहत अब कोई भी विदेशी खिलाड़ी 18 करोड़ रुपये से अधिक नहीं कमा सकेगा, चाहे उसके लिए बोली इससे ज्यादा क्यों न चली जाए। यह फैसला मिनी ऑक्शन में वेतन संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
यह नियम बीसीसीआई की ‘मैक्सिमम फी’ पॉलिसी का हिस्सा है, जिसे इसलिए लागू किया गया है ताकि मिनी ऑक्शन में बाजार असंतुलित न हो और अचानक सैलरी में उछाल न आए। नियम के अनुसार, फ्रेंचाइजी भले ही 18 करोड़ रुपये से अधिक की बोली लगाए, लेकिन खिलाड़ी को भुगतान केवल 18 करोड़ रुपये तक ही किया जाएगा।
No overseas player will be paid more than Rs. 18 crore at #IPL2026Auction on Tuesday, irrespective of the final bid amount.
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— Sportstar (@sportstarweb) December 15, 2025
बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि विदेशी खिलाड़ी की अधिकतम कमाई दो मानकों में से कम वाली राशि पर तय होगी। पहला मानक टॉप रिटेंशन स्लैब यानी 18 करोड़ रुपये है, जबकि दूसरा मानक पिछली मेगा ऑक्शन की सबसे ऊँची बोली है। चूँकि पिछली मेगा ऑक्शन में सबसे बड़ी बोली 27 करोड़ रुपये की थी, इसलिए मिनी ऑक्शन में लागू सीमा 18 करोड़ रुपये ही मानी जाएगी।
इस नियम ने कई प्रशंसकों को भ्रमित भी किया है, क्योंकि बोली 18 करोड़ रुपये से ऊपर जा सकती है, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू नहीं बढ़ेगी। अगर किसी विदेशी खिलाड़ी पर 20 करोड़ रुपये की बोली लगती है, तो उसे 18 करोड़ रुपये ही मिलेंगे, जबकि अतिरिक्त 2 करोड़ रुपये बीसीसीआई के वेलफेयर फंड में जमा हो जाएँगे।
हालाँकि फ्रेंचाइजियों के लिए यह अतिरिक्त रकम काल्पनिक नहीं है। टीम के पर्स से पूरी बोली राशि, यानी 20 करोड़ रुपये ही कटेंगे, न कि केवल 18 करोड़। इससे फ्रेंचाइजियों को सोच-समझकर बोली लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि उनका कुल बजट पूरी तरह प्रभावित होगा।
बीसीसीआई का उद्देश्य साफ है—मिनी ऑक्शन को मेगा ऑक्शन की तरह संतुलित बनाए रखना और विदेशी खिलाड़ियों की सैलरी को अनियंत्रित रूप से बढ़ने से रोकना। 16 दिसंबर को अबू धाबी में हो रहे आईपीएल 2026 मिनी ऑक्शन में यह नियम लागू किया गया है। ऐसे में केकेआर (64.30 करोड़ रुपये का पर्स) और चेन्नई सुपर किंग्स (43.40 करोड़ रुपये का पर्स) जैसी फ्रेंचाइजियों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।
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