पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव सामने आया है। चुनाव आयोग ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया के बाद 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए हैं। ये नाम उन लोगों के थे जो या तो निधन हो चुके हैं, स्थायी रूप से कहीं और स्थानांतरित हो गए हैं, लापता पाए गए हैं या जिनके नाम एक से अधिक जगह दर्ज थे। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें 15 जनवरी 2026 तक दावा या आपत्ति दर्ज कराकर अपना नाम दोबारा जुड़वाने का मौका दिया गया है।
मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) से मिली जानकारी के अनुसार कुल 58 लाख 20 हजार 898 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जिनकी मृत्यु हो चुकी है। ऐसे करीब 24 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 20 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जो अपना पुराना पता छोड़कर स्थायी रूप से कहीं और चले गए थे।
जाँच में यह भी सामने आया कि करीब 12 लाख से ज्यादा मतदाता अपने पते पर नहीं मिले, इसलिए उन्हें ‘लापता’ मानते हुए सूची से बाहर कर दिया गया। वहीं, 1 लाख 38 हजार से अधिक नाम डुप्लीकेट पाए गए, यानी एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में एक से ज्यादा बार दर्ज था। इसके अलावा लगभग 57 हजार नाम अन्य कारणों से भी हटाए गए हैं।
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अगर किसी मतदाता का नाम गलती से सूची से हट गया है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने नाम जाँचने और दोबारा जुड़वाने की पूरी प्रक्रिया आसान रखी है। मतदाता चुनाव आयोग की वेबसाइट, voters.eci.gov.in पोर्टल या ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन अपना नाम या EPIC नंबर डालकर स्थिति की जाँच कर सकते हैं।
अगर ऑनलाइन जाँच में किसी तरह की परेशानी हो, तो संबंधित क्षेत्र के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से सीधे संपर्क भी किया जा सकता है। यदि नाम सूची से हटाया गया है, तो मतदाता फॉर्म-6 भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा दर्ज करा सकते हैं।
यह दावा या आपत्ति 15 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से या BLO के पास जाकर दी जा सकती है। इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा सुनवाई की जाएगी और प्रस्तुत दस्तावेजों की जाँच के बाद नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ने पर फैसला लिया जाएगा।
नाम दोबारा जुड़वाने के लिए मतदाता को अपनी भारतीय नागरिकता और पात्रता साबित करनी होगी। इसके लिए जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, सरकार द्वारा जारी पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र या 1987 से पहले जारी किया गया कोई भी सरकारी दस्तावेज सबूत के रूप में जमा किया जा सकता है।
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