लोकसभा में मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को ग्रामीण रोजगार की गारंटी से जुड़ा एक अहम विधेयक पेश किया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 को सदन में रखा। यह बिल मौजूदा मनरेगा (MGNREGA) की जगह लाने का प्रस्ताव है, जिसमें कई बड़े बदलाव किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का दावा है कि यह नया बिल कई मायनों में मनरेगा से बेहतर है। इसके जरिए रोजगार, पारदर्शिता, योजना निर्माण और जवाबदेही को मजबूत किया जाएगा। बिल के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में करीब 60 दिनों तक सरकारी रोजगार कार्य नहीं कराए जाएंगे। इनमें बुवाई और कटाई जैसे चरम कृषि मौसम शामिल होंगे, ताकि मजदूरों और किसानों को खेती से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके।
Rural Development Minister @ChouhanShivraj introduces The Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB – G RAM G ( विकवित भारत – जी राम जी ) Bill,2025 in Lok Sabha.
That The Bill to establish a rural development framework aligned with the national… pic.twitter.com/vKqHEPEX4y
— SansadTV (@sansad_tv) December 16, 2025
फंडिंग व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। अभी तक मनरेगा में अधिकांश खर्च केंद्र सरकार उठाती थी और राज्य सरकारें काफी हद तक केंद्र पर निर्भर रहती थीं। नए ‘राम जी’ बिल में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझा फंडिंग की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि इससे राज्यों की जवाबदेही बढ़ेगी और काम शुरू करने में होने वाली देरी कम होगी। साथ ही, “केंद्र से पैसा नहीं आया” जैसे बहानों पर भी रोक लगेगी।
मनरेगा के तहत हर साल लेबर बजट तय किया जाता था, लेकिन बजट खत्म होते ही काम रोकने की समस्या सामने आती थी। नए बिल में लेबर बजट की जगह ‘मानक आवंटन’ प्रणाली का प्रस्ताव है, जिसके तहत खर्च एक तय ढाँचे में होगा। इससे बढ़ती माँग के बावजूद काम बंद होने की समस्या को कम करने का दावा किया गया है।
कृषि मौसम को लेकर भी नए बिल में स्पष्ट प्रावधान किया गया है। मनरेगा में खेती के मौसम और गैर-खेती मौसम के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं था, लेकिन ‘राम जी’ बिल में कहा गया है कि कृषि के प्रमुख मौसम में लगभग 60 दिनों तक रोजगार गारंटी पर विराम रहेगा। सरकार का तर्क है कि इस दौरान मजदूरों को खेती से स्वाभाविक रूप से रोजगार मिल जाता है।
मनरेगा पर लंबे समय से फर्जी जॉब कार्ड, अधूरे काम और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। सरकार का कहना है कि नया ‘राम जी’ बिल एक अधिक अनुशासित और जवाबदेह ढाँचा पेश करता है, जिसमें काम, समय और भुगतान पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। इससे योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का भरोसा मजबूत होगा।
हालाँकि इस बिल को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि नाम बदलने की इस “सनक” का कोई औचित्य नहीं है, खासकर जब इस पर भारी खर्च होता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने गरीबों को 100 दिन के रोजगार का कानूनी अधिकार दिया था, जबकि नया बिल उस अधिकार को कमजोर करता है। प्रियंका गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने काम के दिनों की संख्या तो बढ़ा दी है, लेकिन मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।
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