दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन की पार्किंग के पास हुए बम धमाके की जाँच में कई बड़े नाम और एक संगठित आतंकी नेटवर्क सामने आया है। जाँच में पता चला है कि कट्टरपंथी डॉक्टरों का एक पूरा मॉड्यूल आतंक की राह पर चल पड़ा था, जिसका मकसद दिल्ली सहित कई शहरों में बड़े धमाके करना था। इस नेटवर्क में सहारनपुर से गिरफ्तार अनंतनाग का डॉक्टर आदिल अहमद, फरीदाबाद में विस्फोटक इकट्ठा करने वाला मुजम्मिल शकील और तीसरा डॉक्टर उमर मोहम्मद शामिल थे। माना जा रहा है कि उमर मोहम्मद ही कार सवार फिदायीन हमलावर था, जिसने विस्फोट को अंजाम दिया।
फरीदाबाद से गिरफ्तार डॉक्टर शाहीना को जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग की जिम्मेदारी दी गई थी। ‘जमात-उल-मोमीनात’ नामक यह विंग भारत में महिला रिक्रूटमेंट का काम देखता है और इसकी कमान डॉक्टर शाहीना को सौंपी गई थी। वहीं सादिया अजहर—जो जैश की पाकिस्तान स्थित महिला विंग की प्रमुख है—जैश प्रमुख मसूद अजहर की बहन है। उसका पति यूसुफ अजहर कंधार हाईजैकिंग का मास्टरमाइंड बताया जाता है।
डॉक्टर आदिल मोहम्मद अनंतनाग के एक अस्पताल में सीनियर डॉक्टर है। 19 अक्टूबर को उसने श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगाए थे। सीसीटीवी से पहचान होने के बाद सर्विलांस के जरिए 6 नवंबर को उसे सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया। उसके अनंतनाग स्थित लॉकर से राइफल और अन्य संवेदनशील सामग्री भी मिली। आदिल की गिरफ्तारी से फरीदाबाद के डॉक्टर मुजम्मिल शकील का सुराग मिला।
कार में बैठा था डॉक्टर उमर मोहम्मद।
उमर मोहम्मद के 2 भाई और मां को गिरफ्तार किया गया।
उमर मोहम्मद से जुड़े 12 लोगों के फ़ोन को जब्त कर लिया गया है।
अभीतक एजेंसी इसे फिदायीन हमला मान रही है, डॉक्टर उमर मोहम्मद के बॉडी पार्ट्स भी मिले हैं।
जैश ए मोहम्मद से बताया जा रहा है उमर… pic.twitter.com/iOfZ2cV3Tm
— One India News (@oneindianewscom) November 11, 2025
मुजम्मिल शकील को जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की ज्वाइंट टीम ने पकड़ा। वह फरीदाबाद के धौज इलाके में किराये के कमरे में रहता था, जहाँ से 360 किलो विस्फोटक, 20 टाइमर, दो असॉल्ट राइफल और भारी मात्रा में अन्य आतंकी सामग्री बरामद की गई। उसकी निशानदेही पर फरीदाबाद के एक गांव से 2560 किलो से अधिक विस्फोटक बरामद किया गया, जिसके लिए ट्रक मंगाया गया था। वह पुलवामा का रहने वाला है और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था।
इन दोनों डॉक्टरों का तीसरा साथी उमर मोहम्मद बताया जा रहा है, जो अभी तक गिरफ्त से दूर रहा था। उमर भी अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाता था। माना जाता है कि वही लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार में बैठा फिदायीन हमलावर था, जिसके विस्फोट में 9 लोगों की मौत हुई।
कार मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। सलमान ने बताया कि उसने यह कार डेढ़ साल पहले ओखला में देवेंद्र नाम के व्यक्ति को बेची थी। देवेंद्र ने कार अंबाला में बेची, जहाँ से वह पुलवामा के तारिक तक पहुँची। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तारिक को पकड़ा और उसने खुलासा किया कि उसने ही यह कार डॉक्टर उमर मोहम्मद को दी थी।
जाँच में यह भी सामने आया है कि जम्मू-कश्मीर में अंसार गजावत-उल-हिंद संगठन से जुड़े यासिर को भी गिरफ्तार किया गया है। माना जाता है कि यासिर ने ही इन डॉक्टरों का ब्रेनवॉश कर उन्हें इस बड़े आतंकी साजिश का हिस्सा बनाया।
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