राजधानी दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास सोमवार (10 नवंबर 2025) को एक शक्तिशाली कार विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। यह धमाका हिंदू और जैन मंदिरों से कुछ ही मीटर की दूरी पर हुआ। चांदनी चौक स्थित 800 साल पुराने ऐतिहासिक शिवलिंग वाले गौरी शंकर मंदिर से यह स्थल लगभग 100 मीटर दूर है, जबकि पास का जैन मंदिर लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके आगे गुरुद्वारा भी मौजूद है। यह इलाका आमतौर पर अत्यधिक भीड़भाड़ वाला होता है, हालांकि सोमवार को बाजार बंद होने के कारण भीड़ कम थी। इस वजह से यह आशंका और गहराती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र को ही निशाना बनाने की कोशिश की गई।
लाल किला नहीं , गौरी शंकर मंदिर था निशाना!
वजह 1 – सोमवार के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़
वजह 2 – यह मंदिर वीर मराठों द्वारा बनाया गया, पौराणिक स्थल है
वजह 3 – कोई भी मुस्लिम बादशाह इसे बंद नहीं कर पाया।
वजह 4 – हिंदू आस्था का प्रतीक यह मंदिर जिहादी आँखों में खटकता… pic.twitter.com/f4SY9J3ruW
— Shivam Dixit (@ShivamdixitInd) November 11, 2025
विस्फोट के तुरंत बाद भीषण आग लग गई, जिसने आसपास खड़ी कई गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। पुरानी दिल्ली की घनी आबादी वाली गलियों में अफरा-तफरी फैल गई। दिल्ली अग्निशमन विभाग ने बताया कि उन्हें कई कॉल ‘विस्फोट जैसी आवाज़ों’ के बारे में मिलीं। सवाल उठ रहा है कि विस्फोट के लिए गौरी शंकर मंदिर के इतने नजदीक का रेड लाइट क्रॉसिंग ही क्यों चुना गया? इससे पहले 22 दिसंबर 2000 को भी आतंकियों ने लाल किला परिसर के भीतर हमला कर भारतीय जवानों को निशाना बनाया था, जिसमें तीन जवान शहीद हुए थे। करीब 25 साल बाद एक बार फिर लाल किला परिसर के पास, गौरी शंकर और जैन मंदिर के क्षेत्र को लक्षित कर कार विस्फोट किया गया है। शुरुआती जाँच में यह स्पष्ट है कि यह सीएनजी ब्लास्ट नहीं था।
जाँच एजेंसियों ने कई एंगल से पड़ताल शुरू कर दी है। विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि क्या इस धमाके में सीमा पार आतंकवाद या पाकिस्तान की भूमिका है। यदि जाँच में यह साबित होता है, तो भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए ‘ऑपररेशन सिंदू’ को सक्रिय करने में देर नहीं करेगा।
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