दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास हुए बम ब्लास्ट मामले में सुरक्षा एजेंसियों को एक और बड़ा सुराग मिला है। जांच में पता चला है कि इस धमाके की साजिश के लिए 20 लाख रुपये की फंडिंग गिरफ्तार लेडी डॉक्टर शाहीन के जरिए मॉड्यूल तक पहुँचाई गई थी। शाहीन पर पहले से ही इस हमले में कई तरह की मदद करने का संदेह था, जिसे अब जांच से मजबूती मिल रही है।
गौरतलब है कि इस हमले को सुरक्षा एजेंसियाँ एक आत्मघाती हमला मान रही हैं। 10 नवंबर को लाल किला के करीब खड़ी i20 कार में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकी उमर मोहम्मद ने धमाका किया था। इस भयानक विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि जैश का आतंकी उमर मोहम्मद संभवत: एक ‘शू बॉम्बर’ की तरह काम कर रहा था। एजेंसियों को ब्लास्ट साइट से उमर की कार के राइट फ्रंट टायर और ड्राइविंग सीट के नीचे से एक जूता बरामद हुआ है। इस जूते में मेटल जैसा पदार्थ मिला है, जिसके जरिए धमाका किया गया होने की संभावना मजबूत हो गई है। इसके अलावा, टायर और जूते दोनों से TATP (ट्राई एसिटोन ट्राई पेरॉक्साइड) के ट्रेसेस मिले हैं।
जांच से यह भी पुष्टि हुई है कि इस विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट के साथ TATP का उपयोग किया गया था। एजेंसियों को संदेह है कि जैश के आतंकी बड़ी मात्रा में TATP इकट्ठा कर रहे थे और किसी बड़े हमले की योजना बनाई जा रही थी।
2001 के ‘शू बॉम्बर’ जैसा पैटर्न
इस हमले की शैली ने सुरक्षा एजेंसियों को 2001 की उस घटना की याद दिला दी, जब रिचर्ड रीड नाम के एक अमेरिकी शू बॉम्बर ने पेरिस से मियामी जा रही फ्लाइट में अपने जूतों में छिपे TATP विस्फोटक से धमाका करने की कोशिश की थी। वह कोशिश नाकाम रही थी, लेकिन तकनीक वही थी। अब तक की तफ्तीश से संकेत मिल रहे हैं कि उमर मोहम्मद ने भी ठीक उसी पैटर्न पर यह आत्मघाती हमला अंजाम दिया।
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