राजनिगंधा प्रेजेंट्स जागरण फिल्म फेस्टिवल (JFF) के 14वें संस्करण की दिल्ली में शुरुआत हो गई है। दुनिया के बड़े ट्रैवलिंग फिल्म फेस्टिवल्स में शामिल JFF में फिल्मों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ सिनेमा, समाज और कहानी कहने की जिम्मेदारी से जुड़े कई विशेष पैनल डिस्कशन, बातचीत और मास्टरक्लास आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ‘द एथिक्स ऑफ स्टोरीटेलिंग’ विषय पर आयोजित एक खास पैनल चर्चा में अभिनेत्री लिलेट दुबे, फिल्ममेकर पैन नलिन और एक्टर-फिल्ममेकर ऐमी बरुआ ने हिस्सा लिया।
इस दौरान कहानी कहने की नैतिक जिम्मेदारी, रचनात्मक स्वतंत्रता, दर्शकों पर सिनेमा के प्रभाव और कलाकारों की सामाजिक भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। पैनल में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी कहानी को पर्दे पर पेश करते समय सिर्फ रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि उसके संभावित सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझना भी महत्वपूर्ण है।
लिलेट दुबे ने मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन पर रखी बात
पैनल डिस्कशन के दौरान लिलेट दुबे ने व्यक्ति की मानसिक स्थिति, आंतरिक शांति और उसके व्यक्तित्व के बीच संबंध पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की अंदरूनी स्थिति उसके चेहरे, व्यवहार और दुनिया को देखने के नजरिए में दिखाई देती है।
लिलेट दुबे ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के माहौल, अपनी प्रकृति और अपने जीवन के साथ सामंजस्य में है, तो उसके भीतर एक अलग तरह की शांति होती है। वहीं, अगर व्यक्ति खुद से या अपनी जिंदगी से खुश नहीं है तो समय के साथ वह बेचैनी उसके चेहरे और व्यक्तित्व में नजर आने लगती है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाहरी बदलावों और कई तरह की कोशिशों से पहले व्यक्ति को अपने भीतर संतुलन स्थापित करने पर काम करना चाहिए।
लिलेट दुबे ने कहा, “हजार चीजें करने की कोशिश करने से पहले सबसे पहले अपने भीतर को थोड़ा ठीक करें। उसके बाद शायद आपको बहुत सारी चीजें करने की जरूरत ही न पड़े।”
‘हमारी मानसिक स्थिति तय करती है कि हम दुनिया को कैसे देखते हैं’
लिलेट दुबे के विचारों का केंद्र मानसिक शांति और आत्म-संतुलन रहा। उनका कहना था कि हमारी मानसिक और शारीरिक स्थिति केवल हमारे स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि यह भी तय करती है कि हम खुद को और अपने आसपास की दुनिया को किस नजरिए से देखते हैं।
उन्होंने बुजुर्ग लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जीवन से असंतोष या अंदर की बेचैनी चेहरे पर साफ दिखाई देने लगती है। ऐसे में जरूरी है कि व्यक्ति सिर्फ बाहरी उपलब्धियों या बदलावों के पीछे भागने के बजाय अपने मन की स्थिति को समझे।
कहानीकार की जिम्मेदारी कहां तक?
‘द एथिक्स ऑफ स्टोरीटेलिंग’ पैनल का दायरा व्यक्तिगत अनुभवों तक सीमित नहीं रहा। चर्चा में यह सवाल भी प्रमुखता से उठा कि फिल्म, वेब सीरीज या अन्य माध्यमों के जरिए कहानी सुनाने वाले कलाकार और फिल्ममेकर दर्शकों के प्रति कितने जिम्मेदार होते हैं।
पैनल में प्रतिनिधित्व, संवेदनशील विषयों के चित्रण, रचनात्मक स्वतंत्रता और समाज पर पड़ने वाले सिनेमा के प्रभाव को लेकर भी विचार रखे गए। चर्चा का प्रमुख सवाल यही रहा कि क्या कहानीकार की जिम्मेदारी केवल अपनी कहानी को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तक सीमित है या उसे यह भी सोचना चाहिए कि दर्शक उस कहानी से क्या संदेश लेकर जाएंगे।
सिनेमा और समाज के रिश्ते पर हुई चर्चा
पैनल में शामिल वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। फिल्में लोगों की सोच, सामाजिक धारणाओं और कई बार व्यक्तिगत निर्णयों को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में फिल्ममेकर के सामने रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है।
इसी वजह से जागरण फिल्म फेस्टिवल में फिल्म स्क्रीनिंग के साथ ऐसी चर्चाओं को भी जगह दी जा रही है, जहां सिनेमा से जुड़े कलाकार, फिल्ममेकर और दर्शक कहानी कहने की प्रक्रिया और उसकी जिम्मेदारियों को नए नजरिए से समझ सकें।
दिल्ली में तीन दिनों तक चलेगा जागरण फिल्म फेस्टिवल
दिल्ली में अगले तीन दिनों तक चलने वाला जागरण फिल्म फेस्टिवल विभिन्न फिल्मों की स्क्रीनिंग, पैनल डिस्कशन, मास्टरक्लास और विशेष संवाद सत्रों के माध्यम से दर्शकों को सिनेमा के अलग-अलग पहलुओं से परिचित कराएगा।
फेस्टिवल का उद्देश्य सिनेमा को केवल बड़े पर्दे पर दिखाई देने वाली कहानियों तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उसके जरिए समाज, संस्कृति, व्यक्तिगत अनुभव और बदलती दुनिया से जुड़े मुद्दों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना भी है।
लिलेट दुबे की मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन को लेकर कही गई बातों ने इस चर्चा को एक व्यक्तिगत और दार्शनिक आयाम भी दिया। उनका संदेश यही रहा कि जीवन में बाहरी बदलाव की शुरुआत करने से पहले व्यक्ति के लिए अपने भीतर की स्थिति को समझना और उसे बेहतर बनाना जरूरी है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel