सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल से जुड़े गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में PG रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. हर्ष पंड्या की मौत और रैगिंग मामले में गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड डॉ. सुमैया मुल्ला को तत्काल प्रभाव से 90 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। सरकारी कार्रवाई रैगिंग की शिकायतों पर समय रहते पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाने से जुड़ी है। डॉ. मुल्ला को निलंबन अवधि के दौरान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, वडोदरा में मुख्यालय रखने का निर्देश दिया गया है।
इस कार्रवाई के बीच डॉ. सुमैया मुल्ला को लेकर कुछ पूर्व छात्राओं ने करीब सात साल पुराने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व छात्राओं का आरोप है कि पढ़ाई के दौरान उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था, धार्मिक वीडियो दिखाए जाते थे और हिंदू धर्म को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती थीं। ये पूर्व छात्राओं के आरोप हैं; इन दावों की किसी सरकारी जांच में पुष्टि होने की स्वतंत्र जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
पूर्व छात्रा का आरोप- ‘आप और आपके माता-पिता को यह धर्म अपना लेना चाहिए’
नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर एक पूर्व छात्रा ने आरोप लगाया कि करीब सात साल पहले विभाग में रहने के दौरान डॉ. सुमैया मुल्ला कथित तौर पर धर्म को लेकर उनसे लगातार बातचीत करती थीं। छात्रा का दावा है कि उससे कहा गया था कि उसे और उसके माता-पिता को इस्लाम अपना लेना चाहिए।
पूर्व छात्रा ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान हिंदू अंतिम संस्कार की परंपराओं की तुलना इस्लाम से की जाती थी और इस्लाम को भविष्य में रहने वाला धर्म बताते हुए उसे अपनाने के लिए कहा जाता था।
YouTube पर मौलानाओं के वीडियो दिखाने का आरोप
एक पूर्व छात्रा का दावा है कि विभाग में धार्मिक विषयों से संबंधित YouTube वीडियो भी दिखाए जाते थे। आरोप के मुताबिक, इस दौरान इस्लाम की खूबियां बताकर उसकी तुलना हिंदू धर्म से की जाती थी।
छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि बातचीत में हिंदुओं के लिए ‘काफिर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि इन आरोपों को लेकर अब तक किसी जांच एजेंसी या स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
‘कलमा और नमाज पढ़वाने’ का भी दावा
एक अन्य पूर्व छात्रा ने दावा किया कि एक डॉक्टर से कथित तौर पर कलमा पढ़वाया गया और नमाज भी पढ़वाई गई। उसने आरोप लगाया कि HOD रूम के वॉशबेसिन के पास वजू की प्रक्रिया समझाई गई और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एक अलग कमरे में नमाज पढ़ी जाती थी।
उसका दावा है कि वह भी एक बार डॉ. मुल्ला के साथ नमाज में शामिल हुई थी। पूर्व छात्रा के मुताबिक, उससे कथित तौर पर मुस्लिम युवक से शादी करने की बात भी कही गई और इसके लिए रिश्ता दिखाने तक की पेशकश की गई थी।
इन आरोपों को प्रकाशित करते समय यह महत्वपूर्ण है कि इन्हें पूर्व छात्राओं के दावे के रूप में ही देखा जाए। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक निलंबन कार्रवाई रैगिंग मामले में कथित प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ी है, न कि इन पुराने धार्मिक आरोपों की पुष्टि से।
पूर्व छात्र का आरोप- MD में जानबूझकर किया गया परेशान
एक अन्य पूर्व विद्यार्थी ने अकादमिक प्रताड़ना का भी आरोप लगाया। पूर्व छात्र का दावा है कि MD की पढ़ाई के दौरान उसे अटेंडेंस के आधार पर परीक्षा देने से रोक दिया गया, जबकि उसके अनुसार उसकी ओवरऑल अटेंडेंस पर्याप्त थी।
पूर्व छात्र ने आरोप लगाया कि वह दो परीक्षाओं में फेल हुआ और तीसरी बार पास हुआ। उसके मुताबिक, तीन वर्षों तक उससे अत्यधिक काम कराया गया और कथित रूप से परीक्षा के दौरान भी उसके खिलाफ माहौल बनाया गया। इस कारण तीन साल का MD कोर्स पूरा करने में उसे चार साल लगे।
डॉ. सुमैया मुल्ला का पक्ष सामने नहीं आया
यूजर द्वारा साझा की गई दिव्य भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, इन पुराने आरोपों पर प्रतिक्रिया लेने के लिए डॉ. सुमैया मुल्ला से संपर्क करने की कोशिश की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पत्रकार के परिचय देने के बाद फोन कट गया और बाद की कॉल का जवाब नहीं दिया गया। इसलिए इन विशिष्ट आरोपों पर उनका विस्तृत पक्ष सामने नहीं आ सका।
डॉ. हर्ष पंड्या की मौत के बाद सामने आया रैगिंग मामला
सूरत गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रथम वर्ष के PG छात्र डॉ. हर्ष पंड्या 9 अगस्त 2026 को हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। इसके बाद हुई जांच में प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ मानसिक उत्पीड़न, गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार के आरोप सामने आए। कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने नौ प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टरों और हर्ष पंड्या के पिता की शिकायतों के आधार पर जांच की थी।
जांच में यह स्थापित किया गया कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ रैगिंग हुई थी। हालांकि कॉलेज की रिपोर्ट ने रैगिंग और डॉ. पंड्या की मौत के बीच सीधे कारणात्मक संबंध को स्थापित नहीं किया और कहा कि मौत के पीछे अन्य कारणों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
4 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर 6 महीने के लिए सस्पेंड
एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच के बाद चार सेकंड ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों—डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज माहेश्वरी, डॉ. दीक्षिता घेवरिया और डॉ. हिना भूत—को छह महीने के लिए सस्पेंड किया गया। उन्हें हॉस्टल खाली करने और अकादमिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेने का आदेश भी दिया गया था।
पुलिस की पहली FIR में आरोप लगाया गया कि 5 अगस्त को प्रथम वर्ष के 10 छात्रों को माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सीरोलॉजी लैब में बुलाया गया और करीब दो घंटे तक वहां बैठाकर कथित तौर पर अपमानित तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
चारों डॉक्टरों पर आत्महत्या के लिए उकसाने की दूसरी FIR
मामले में बाद में डॉ. हर्ष पंड्या के पिता की शिकायत पर चारों आरोपी रेजिडेंट डॉक्टरों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दूसरी FIR भी दर्ज की गई। शिकायत में पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को लगातार प्रताड़ित और अपमानित किया गया तथा उसकी जाति के कारण भी निशाना बनाया गया।
पहले HOD समेत चार फैकल्टी को मिला था शो-कॉज नोटिस
मामले की शुरुआती जांच के बाद माइक्रोबायोलॉजी विभाग की HOD डॉ. सुमैया मुल्ला के साथ डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। सरकार को उनकी प्रतिक्रियाएं भेजे जाने के बाद डॉ. मुल्ला पर 90 दिनों के निलंबन की कार्रवाई की गई।
इस मामले ने अब मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग रोकने के सिस्टम के साथ-साथ फैकल्टी की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पूर्व छात्रों की ओर से सामने आए पुराने धर्म परिवर्तन संबंधी आरोप मामले को नया मोड़ दे रहे हैं, लेकिन इन दावों की आधिकारिक पुष्टि या जांच का निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
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