उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर शुक्रवार को भारत और जापान की दोस्ती का एक अलग ही रंग देखने को मिला। यहां औपचारिक कूटनीतिक बातचीत से अलग भारत और जापान के स्कूली बच्चों ने गीत-संगीत, संवाद और सांस्कृतिक अनुभवों के जरिए एक-दूसरे को करीब से जाना। कार्यक्रम के आखिर में जब जापानी बच्चों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ सेल्फी ली तो उनका उत्साह देखते ही बन रहा था।
उत्तर प्रदेश-जापान निवेश बैठक के तहत मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित ‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ कार्यक्रम में जापान के यामानाशी प्रांत से आए 13 बच्चों ने लखनऊ के स्कूली छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी भी मौजूद रहे।
जापानी भाषा में CM योगी ने किया बच्चों का स्वागत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान से आए बच्चों और उनके शिक्षकों का गर्मजोशी से स्वागत किया। खास बात यह रही कि उन्होंने जापानी भाषा में ‘ओहायो गोजाइमासु’ कहकर उनका अभिवादन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल दो देशों के स्कूली बच्चों की मुलाकात नहीं है, बल्कि भारत और जापान की नई पीढ़ियों को आपस में जोड़ने का माध्यम है। ऐसे संवाद दोनों देशों के बच्चों को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं, जीवनशैली और सोच को करीब से समझने का अवसर देते हैं।
લખનૌમાં CM યોગીનો ક્રેઝ! સેલ્ફી માટે ઉત્સાહિત જોવા મળ્યા જાપાની બાળકો
ઉત્તર પ્રદેશના મુખ્યમંત્રી યોગી આદિત્યનાથે લખનૌમાં જાપાનના યામાનાશી પ્રીફેક્ચરના ગવર્નર કોટારો નાગાસાકી સાથે મુલાકાત કરી હતી. આ દરમિયાન તેમણે જાપાની અને ભારતીય વિદ્યાર્થીઓ સાથે સંવાદ પણ કર્યો.
ખાસ વાત એ રહી… pic.twitter.com/uGCqzpgERC
— Sudarshan ગુજરાત (@SudarshanNewsGJ) August 21, 2026
अयोध्या से ताजमहल तक के अनुभवों पर हुई चर्चा
संवाद के दौरान उत्तर प्रदेश और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र हुआ। बच्चों ने अयोध्या, मथुरा, वाराणसी, सारनाथ और ताजमहल जैसी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जगहों को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक बच्चा लखनऊ के किसी गांव से हो सकता है और दूसरा जापान के किसी गांव से। उनकी भाषाएं और परिवेश अलग हो सकते हैं, लेकिन दोनों ही अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
उन्होंने भारत-जापान संबंधों में युवा पीढ़ी की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले समय में यही बच्चे दोनों देशों के बीच मजबूत पुल बन सकते हैं।
भारत को सिर्फ बाजार नहीं, दोस्त के रूप में देखें: CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी बच्चों को भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे मित्र के रूप में समझने का संदेश दिया, जिसके जापान के साथ पुराने सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंध हैं।
वहीं भारतीय विद्यार्थियों से उन्होंने जापान की अनुशासित कार्य संस्कृति, टीमवर्क, स्वच्छता, समय की पाबंदी और पारंपरिक कलाओं से सीखने की बात कही।
मुख्यमंत्री के अनुसार भारत और जापान एक-दूसरे की खूबियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। जापान की आत्म-अनुशासन, सटीकता, गुणवत्ता, टीमवर्क और नवाचार की ताकत तथा भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा, विविधता और रचनात्मकता का मेल नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
जापान का सामाजिक सामंजस्य और भारत का ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’
मुख्यमंत्री ने जापान के सामाजिक सामंजस्य और भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा के बीच समानता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बच्चों से केवल एक-दूसरे की भाषा सीखने तक सीमित न रहने, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और सोच को भी समझने का प्रयास करने को कहा।
उनका कहना था कि जब भारत और जापान की क्षमताएं साथ आएंगी तो उसका लाभ केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई संभावनाएं पैदा होंगी।
जापानी गीत के जवाब में गूंजा ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। जापान से आए बच्चों ने अपनी भाषा में गीत प्रस्तुत किया। इसके जवाब में भारतीय छात्र ईशान ने भगवान राम को समर्पित ‘कौशल्या दशरथ के नंदन’ गीत की प्रस्तुति दी।
दो अलग-अलग भाषाओं में हुई इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावनात्मक और सांस्कृतिक रंग दे दिया। संगीत के माध्यम से दोनों देशों के बच्चों ने दिखाया कि भाषा अलग होने के बावजूद भावनाएं लोगों को जोड़ सकती हैं।
‘आप मेहमान नहीं, अपने हैं’
लखनऊ की छात्रा अक्षरा पांडेय ने जापानी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए भारत की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने जापानी मेहमानों को अपने जैसा बताते हुए जापानी भाषा में ‘अरिगातो’ भी कहा।
जापानी छात्र कजामा के लिए भारत का दौरा इसलिए भी खास था क्योंकि यह उनकी पहली विदेश यात्रा थी। उन्होंने भारत के लोगों के मित्रवत व्यवहार की सराहना की। भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में बाइक और गाड़ियों को देखना भी उनके लिए नया अनुभव रहा।
ताजमहल की भव्यता और संगमरमर की खूबसूरती ने भी उन्हें प्रभावित किया। कजामा ने भविष्य में भारत और जापान के बीच दोस्ती का पुल बनने की इच्छा जताई।
पहली बार लगाई बिंदी, भारतीय संस्कृति ने जीता दिल
जापानी छात्रा मियागी मोतो के लिए भी भारत यात्रा कई यादगार अनुभव लेकर आई। ताजमहल देखने के अलावा उन्होंने पहली बार भारतीय बिंदी लगाई।
उन्होंने अलग-अलग संस्कृतियों को समझने और उनका सम्मान करने को महत्वपूर्ण बताया तथा भविष्य में भारत-जापान की मित्रता को मजबूत करने में योगदान देने की इच्छा जताई।
ओरिगेमी से दिया शांति और दोस्ती का संदेश
जापानी बच्चों ने अपनी पारंपरिक कागज कला ओरिगेमी के जरिए भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। बच्चों ने स्वयं तैयार की गई कलाकृतियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट कीं। इन कलाकृतियों के माध्यम से शांति और मित्रता का संदेश दिया गया।
इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी बच्चों के साथ तस्वीरें और सेल्फी भी खिंचवाईं। मुख्यमंत्री के साथ सेल्फी और तस्वीरें लेने को लेकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
यामानाशी के गवर्नर ने दोस्ती जारी रखने का दिया संदेश
यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच बनी यह मित्रता केवल इस मुलाकात तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आगे भी एक-दूसरे के संपर्क में रहने और इस दोस्ती को मजबूत करने का आह्वान किया।
निवेश से आगे बढ़कर नई पीढ़ी की दोस्ती का मंच बना कार्यक्रम
‘ए डायलॉग विद द फ्यूचर’ कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच आर्थिक एवं निवेश संबंधों के साथ-साथ पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को भी सामने रखा। यामानाशी के 13 बच्चों ने लखनऊ के विद्यार्थियों से मुलाकात की, अपनी संस्कृति साझा की और भारतीय संस्कृति को करीब से समझा।
गीतों से लेकर ओरिगेमी और ताजमहल से लेकर बिंदी तक, बच्चों के अनुभवों ने भारत-जापान संबंधों को एक मानवीय और सांस्कृतिक आयाम दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ जापानी बच्चों की उत्साहपूर्ण मुलाकात और सेल्फी कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल रही।
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