राजधानी दिल्ली स्थित आंध्र भवन में हाल ही में एक दिलचस्प और दिल छू लेने वाला नज़ारा देखने को मिला, जब भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची कैंटीन में परोसी गई बिरयानी को चम्मच-कांटे की बजाय भारतीय परंपरा के अनुसार हाथ से खाते नजर आए। जैसे ही उन्होंने यह देसी अंदाज़ अपनाया, वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान फैल गई और किसी ने इस खास पल को कैमरे में कैद कर लिया।
वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने इसे दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सहज और आत्मीय जुड़ाव का खूबसूरत उदाहरण बताया। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति राजदूत ओनो केइची को हाथ से खाने का तरीका समझा रहा है। वह ध्यान से सीखते हैं और फिर मुस्कुराते हुए हाथ से बिरयानी उठाकर खाते हैं। उनके चेहरे पर अनुभव का आनंद और सहज खुशी साफ झलकती है।
Tried eating biryani by hand — following my Indian friends😊
Like sushi🍣, it tastes even better when eaten by hand.
I feel I’ve come a little closer to my friends!
చాలా బాగుంది😋 pic.twitter.com/H55Bf9COuE
— ONO Keiichi, Ambassador of Japan (@JapanAmbIndia) January 20, 2026
इस वीडियो को साझा करते हुए राजदूत ओनो केइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जैसे सुशी हाथ से खाने पर ज्यादा स्वादिष्ट लगती है, वैसे ही बिरयानी भी हाथ से खाने पर बेहतर लगती है।” उन्होंने यह भी कहा कि इस अनुभव ने उन्हें अपने भारतीय मित्रों के और करीब ला दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने तेलुगु भाषा में “चाला बागुंदी” लिखकर स्थानीय स्वाद और संस्कृति के प्रति अपनी प्रशंसा भी जाहिर की।
राजदूत का यह छोटा-सा कदम भारतीय भोजन संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। साथ ही यह संदेश भी देता है कि परंपराएं केवल खाने का स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि लोगों और देशों के बीच दिलों को जोड़ने का काम भी करती हैं। यही वजह है कि इस वीडियो ने लोगों के दिल को छू लिया।
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूज़र्स ने राजदूत के खुलेपन और सरल स्वभाव की तारीफ करते हुए इसे “दिल से दिल जोड़ने वाला पल” बताया। लोगों ने कहा कि हाथ से खाना भारतीय भोजन की आत्मा है और इसे अपनाने का उनका यह अंदाज़ सांस्कृतिक विनम्रता का बेहतरीन उदाहरण है।
हालांकि कुछ यूज़र्स ने मज़ाकिया लहजे में आंध्र भवन की बिरयानी को लेकर बहस भी छेड़ दी कि “क्या इसे बिरयानी कहा जा सकता है?” लेकिन अधिकांश लोगों ने इस बहस को नज़रअंदाज़ करते हुए राजदूत की भावना को कहीं अधिक अहम बताया। उनके अनुसार, यह पल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है, जहां एक विदेशी मेहमान भारतीय तरीके से भोजन का आनंद लेते हुए पूरी तरह सहज नजर आता है।
गौरतलब है कि राजदूत ओनो केइची पहले भी भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते नजर आ चुके हैं। हैदराबाद में उन्होंने प्रामाणिक बिरयानी का लुत्फ उठाया था और मुंबई में वड़ा पाव का भी आनंद लिया था। लेकिन इस बार हाथ से बिरयानी खाने का अनुभव इसलिए खास बन गया, क्योंकि इसमें सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति से उनका आत्मीय जुड़ाव भी साफ दिखाई दिया।
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