दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सबरमती हॉस्टल के बाहर हुआ, जिसे जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने आयोजित किया था। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा लगाए गए विवादित नारों ने पूरे मामले को सुर्खियों में ला दिया।
विवादित नारे और छात्र संघ की मौजूदगी
प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ नारे लगाए गए। सूत्रों के अनुसार, नारेबाजी के समय जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिश और सचिव सुनील मौके पर मौजूद थे। इसके अलावा वामपंथी संगठनों से जुड़े कई छात्र भी प्रदर्शन में शामिल थे। फिलहाल पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, हालांकि जांच जारी बताई जा रही है।
JNU कैंपस में उग्र प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगे आपत्तिजनक नारे
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सोमवार रात विवादास्पद घटना सामने आई।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगों के बड़े षड्यंत्र केस में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करने के बाद… pic.twitter.com/CdImIOsClO
— One India News (@oneindianewscom) January 6, 2026
सियासी बयानबाज़ी तेज
जेएनयू में हुई नारेबाजी को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ भी इस तरह के प्रदर्शन होंगे, तो देश में कानून और संविधान का सम्मान कैसे बचेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच अलगाववादी है और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल बेहद शर्मनाक है। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर ऐसे तत्वों का समर्थन करने का आरोप भी लगाया।
"MODI SHAH KI KABRA KHUDEGI JNU KI DHARTI PAR"
Urban Naxals in support of Anti National Umar Khalid and Sharjeel Imam protested late night in JNU outside Sabarmati Hostel.
This is not protest, this appropriation of Anti India Thought!
Intellectual Terorist can be academics,… pic.twitter.com/vwDoiI63pf
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)🇮🇳 (@pradip103) January 6, 2026
इस मामले पर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने एक पोस्ट में लिखा कि जेएनयू की धरती पर हुआ यह प्रदर्शन विरोध नहीं, बल्कि भारत-विरोधी विचारधारा का समर्थन है। उन्होंने इसे ‘इंटेलेक्चुअल टेररिज्म’ से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे लोग अकादमिक, डॉक्टर या इंजीनियर के रूप में भी सामने आ सकते हैं।
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