दिल्ली में आयोजित चाणक्य डिफेंस डायलॉग के दौरान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सुरक्षा चुनौतियों, पाकिस्तान की भूमिका, कश्मीर की स्थिति और क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से बात की। अपने संबोधन में उन्होंने पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य प्रायोजित आतंकवाद भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। बातचीत और आतंकवाद कभी साथ-साथ नहीं चल सकते।”
पाकिस्तान को सख्त संदेश
जनरल द्विवेदी ने कहा कि पाकिस्तान चाहे पर्दे के पीछे रहकर आतंकवाद को बढ़ावा दे, भारतीय सेना उसकी हर गतिविधि पर पूरी नज़र रखती है। उन्होंने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में कश्मीर में आतंकवाद में उल्लेखनीय कमी आई है और मारे गए 61% आतंकी पाकिस्तान से आए थे, जिससे यह प्रमाणित होता है कि सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें अब भी जारी हैं।
#WATCH | Speaking on Operation Sindoor, Chief of Army Staff, General Upendra Dwivedi says, "…Operation Sindoor was just a trailer which ended in 88 hours. We are prepared for any circumstances in future. If Pakistan gives a chance, we will teach it how to behave responsibly… pic.twitter.com/pdKvToDmEm
— ANI (@ANI) November 17, 2025
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह तो सिर्फ “ट्रेलर” था। यदि जरूरत पड़ी, तो पाकिस्तान को यह भी सिखाया जाएगा कि एक जिम्मेदार देश अपने पड़ोसी के साथ कैसा व्यवहार करता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी भी परमाणु दबाव में आने वाला नहीं है और युद्ध चाहे चार महीने चले या चार वर्ष, भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
चीन और पूर्वी लद्दाख पर चर्चा
सेना प्रमुख ने बताया कि चीन के साथ राजनीतिक स्तर पर जारी वार्ताओं का सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है। पूर्वी लद्दाख में तनाव कम होने के बाद दोनों देशों के बीच हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। उनके अनुसार, जब कूटनीति और राजनीतिक दिशा एक साथ चलती हैं, तो रक्षा सहयोग ‘स्मार्ट पावर’ का रूप ले लेता है।
उन्होंने हाल ही में लाल किले पर हुई घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की डिटरेंस क्षमता पूरी तरह प्रभावी है। उन्होंने कहा कि अगर आतंकियों का कोई छोटा से छोटा संकेत या संदेश भी मिलता है, तो सेना उसके स्रोत का पता लगाने में सक्षम है।
मणिपुर हिंसा और म्यांमार शरणार्थियों पर बड़ी बात
मणिपुर की स्थिति पर उन्होंने कहा कि वहाँ राष्ट्रपति शासन लगने के बाद हालात तेजी से सुधरे हैं। जनरल द्विवेदी ने मणिपुर को अपने लिए “स्वर्ग” बताते हुए कहा कि यदि स्थानीय समुदाय आपसी मतभेद दूर कर लें, तो स्थिति और तेजी से सामान्य हो सकती है।
म्यांमार से आए 43,000 शरणार्थियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनमें से कोई व्यक्ति आतंकी गतिविधियों में शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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