पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े उसके फ्रंट टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ़्रंट) ने दिल्ली के लालकिला ब्लास्ट में मारे गए फिदायीन हमलावर जिहादी डॉक्टर उमर को लेकर शोक संदेश जारी किया है। आतंकियों द्वारा जारी इस कथित श्रद्धांजलि को सुरक्षा एजेंसियाँ इसे “प्रचार पाने की रणनीति” और “भर्ती बढ़ाने के हथकंडे” के रूप में देख रही हैं।
टीआरएफ ने अपने बयान में उमर को ‘शहीद’ कहा और उसके “कथित बलिदान” का बदला लेने की धमकी दी है। यह वही डॉक्टर उमर है जिसके जैश-ए-मोहम्मद से सीधे संपर्क होने की पुष्टि हो चुकी है। NIA की जाँच से यह भी साफ हो गया है कि लालकिला के पास जिस कार में 10 नवंबर 2025 को ब्लास्ट हुआ, वह कार खुद उमर चला रहा था।
इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। जाँच में पता चला है कि जैसे-जैसे अलग-अलग राज्यों में छापेमारियाँ और गिरफ्तारियाँ तेज होती गईं, उमर पूरी तरह घबरा गया था। यही बौखलाहट उसके फिदायीन हमले में बदलने का कारण बनी।
NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार डॉक्टर उमर लंबे समय से कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में था और उस पर जैश तथा टीआरएफ दोनों की वैचारिक और लॉजिस्टिक पकड़ थी। टीआरएफ का यह शोक संदेश न केवल आतंकियों की आतंकी गतिविधियों को महिमामंडित करने का प्रयास है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि संगठन भारत में अपने मॉड्यूल को सक्रिय रखने की कोशिश कर रहा है।
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