देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में जांच अब नए मोड़ पर पहुँच गई है। Central Bureau of Investigation (CBI) ने अब उन अभिभावकों को भी अपने रडार पर लिया है, जिन पर लीक पेपर खरीदने का आरोप है।
जांच एजेंसी को शक है कि कुछ संपन्न परिवारों ने अपने बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए लाखों रुपए खर्च कर प्रश्नपत्र हासिल किए।
नांदेड़ और लातूर में CBI की छापेमारी
Nanded और Latur में CBI की आठ सदस्यीय टीम ने कई ठिकानों पर छापेमारी की।
- एक छात्रा के परिवार से करीब 8 घंटे पूछताछ
- मोबाइल, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त
- पेपर खरीदने के लिए 5 से 10 लाख रुपए देने का शक
अधिकारियों के मुताबिक, एक कारोबारी पिता ने कथित तौर पर करीब 10 लाख रुपए देकर पेपर हासिल किया।
कोचिंग संस्थान भी जांच के घेरे में
जांच में एक निजी कोचिंग संस्थान AIB का नाम भी सामने आया है।
संस्थान ने परीक्षा परिणाम से पहले ही “The Results To Come” टैगलाइन के साथ टॉपर्स के पोस्टर लगाए थे, जिसमें संदिग्ध छात्रा की तस्वीर भी शामिल थी।
हालांकि संस्थान के संचालक ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।
कई शहरों तक फैला नेटवर्क
CBI को शक है कि यह पूरा रैकेट Pune, नांदेड़, लातूर और आसपास के इलाकों में फैले एक संगठित नेटवर्क के जरिए चल रहा था।
- अभिभावकों द्वारा 10 से 25 लाख रुपए तक भुगतान
- कुछ मामलों में पेपर आगे भी बेचे गए
- मनी ट्रेल और लाभार्थियों की पहचान जारी
अब लाभार्थियों पर फोकस
अब तक CBI मास्टरमाइंड, पेपर सॉल्वर और बिचौलियों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब जांच का फोकस उन छात्रों और अभिभावकों पर है, जिन्होंने इस घोटाले से फायदा उठाया।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस मामले ने देश की शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और अविश्वास देखा जा रहा है।
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