तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हार के बाद AIADMK के भीतर अब गहरी अंदरूनी कलह सामने आने लगी है। पार्टी के भीतर एक नया गुट उभरकर सामने आया है, जिसका नेतृत्व S. P. Velumani, C. V. Shanmugam और C. Vijayabaskar कर रहे हैं। इस गुट को पार्टी प्रमुख Edappadi K. Palaniswami के खिलाफ माना जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष तेज हो गया है।
पार्टी में नेतृत्व को लेकर टकराव
रिपोर्ट्स के अनुसार, वेलुमणि-शन्मुगम-विजयभास्कर गुट पार्टी नेतृत्व में बदलाव की खुलकर मांग कर रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पलानीस्वामी गुट और विरोधी गुट विधानसभा में शपथ लेने के लिए अलग-अलग पहुंचे। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर विभाजन गहरा चुका है और दोनों गुटों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है।
सूत्रों का दावा है कि पलानीस्वामी विरोधी गुट के पास विधायकों की संख्या ज्यादा हो सकती है, जिससे पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदलने की संभावना बन रही है। यह स्थिति AIADMK के भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पार्टी नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
जोसेफ विजय सरकार को मिल सकता है समर्थन
इस बीच, सियासी हलचल तब और बढ़ गई जब यह अटकलें सामने आईं कि AIADMK के 47 में से करीब 36 विधायक Joseph Vijay के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ TVK सरकार को समर्थन देने के पक्ष में हैं। 13 मई को प्रस्तावित फ्लोर टेस्ट इस पूरे घटनाक्रम का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
यदि AIADMK के विधायक आधिकारिक पार्टी लाइन से हटकर TVK सरकार का समर्थन करते हैं, तो यह न केवल पलानीस्वामी गुट के लिए बड़ा झटका होगा बल्कि पार्टी में शक्ति संतुलन भी पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे हालात में एसपी वेलुमणि एक बड़े शक्ति केंद्र के रूप में उभर सकते हैं और वे पार्टी के महासचिव पद पर दावा भी ठोक सकते हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच AIADMK का यह आंतरिक संकट राज्य की सियासत पर बड़ा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में फ्लोर टेस्ट और विधायकों का रुख तय करेगा कि पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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