उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को वाराणसी से शिक्षा जगत के लिए कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की। बड़ा लालपुर स्थित पंडित दीनदयाल हस्तकला संकुल (TFC) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में स्कूल यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, बैग और स्टेशनरी के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT के जरिए ₹1,200 प्रति छात्र की राशि भेजी गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में 15 शिक्षकों को प्रतीकात्मक स्वास्थ्य कार्ड सौंपकर कैशलेस चिकित्सा योजना की औपचारिक शुरुआत की। योजना के तहत पात्र शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य कार्मिकों तथा उनके आश्रित परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में प्रति परिवार ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
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करीब 12 लाख शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा
‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ उत्तर प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े करीब 12 लाख पात्र लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसमें बेसिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े नियमित शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, शिक्षामित्र, अनुदेशक, विशेष शिक्षक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कार्मिक, रसोइये, वार्डन और अन्य पात्र कर्मचारी शामिल हैं। उनके आश्रित परिवारों को भी योजना की शर्तों के अनुसार लाभ मिलेगा।
योजना आयुष्मान भारत की तर्ज पर कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई है। पात्र परिवार सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। उत्तर प्रदेश के 2026-27 के बजट में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, कर्मचारियों और मानदेय अथवा संविदा आधारित कार्मिकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा हेतु करीब ₹358 करोड़ का प्रावधान किया गया है। गैर-सरकारी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए इसी तरह की योजना हेतु ₹89 करोड़ का अलग प्रावधान है।
‘आपने मांगा नहीं, लेकिन आपके स्वास्थ्य की चिंता हमें है’
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों के स्वास्थ्य को सरकार की जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने इस सुविधा की मांग नहीं की थी, लेकिन सरकार उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षक और कर्मचारी स्वस्थ तथा सुरक्षित रहें, यह आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की शिक्षा पर पूरा ध्यान देने और विद्यालयों के वातावरण को स्वच्छ, सुंदर और प्रेरणादायी बनाने की अपील भी की।
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15 शिक्षकों को सौंपे गए प्रतीकात्मक कैशलेस कार्ड
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजना के शुभारंभ के दौरान 15 शिक्षकों को प्रतीकात्मक स्वास्थ्य कार्ड दिए।
इसके साथ ही प्रदेश स्तर पर इस महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की औपचारिक शुरुआत हो गई। सरकार का उद्देश्य चिकित्सा आपात स्थिति में शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।
1.10 करोड़ छात्रों के लिए ₹1,320 करोड़ की DBT
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी कार्यक्रम से प्रदेश के लगभग 1.10 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के बैंक खातों में DBT के माध्यम से राशि ट्रांसफर की।
प्रति छात्र ₹1,200 के हिसाब से करीब ₹1,320 करोड़ की राशि अभिभावकों के खातों में भेजी गई। इस रकम का उपयोग बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी जैसी जरूरी वस्तुएं खरीदने के लिए किया जा सकेगा।
₹800 से बढ़ाकर ₹1,200 की गई छात्र सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्कूल से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं खरीदने के लिए पहले ₹800 प्रति छात्र दिए जाते थे। बाद में इस सहायता राशि को बढ़ाकर ₹1,200 प्रति छात्र किया गया।
सरकार सीधे अभिभावकों के बैंक खातों में राशि भेजती है, ताकि वे बच्चों की जरूरत के अनुसार यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी खरीद सकें।
विद्यार्थियों के लिए सही मार्ग प्रशस्त करना शिक्षकों का कर्तव्य भी है और राष्ट्रीय दायित्व भी।
12 लाख शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने वाली 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' का आज बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी से… pic.twitter.com/hA18N7DcCJ
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शिक्षा विभाग और SBI के बीच हुआ MoU
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक समझौता भी हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अन्य पात्र कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की आर्थिक तथा सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी कई प्रावधानों का उल्लेख किया गया।
‘नकल करना जन्मसिद्ध अधिकार’ वाले बयान पर CM योगी का हमला
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पुरानी शिक्षा व्यवस्था और नकल संस्कृति पर भी तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को निहित स्वार्थों के कारण नुकसान पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा, “यूपी के एक नेता ने कहा था कि नकल करना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं हो सकता। उन्होंने दावा किया कि अब प्रदेश में नकलविहीन परीक्षाएं कराई जा रही हैं और माध्यमिक परीक्षाओं तथा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को पहले के मुकाबले तेज और व्यवस्थित किया गया है।
‘देश के भविष्य और अखंडता से खिलवाड़ स्वीकार नहीं’
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि देश के भविष्य और अखंडता के साथ किसी को खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि उन्हें आदर्श खोजने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। आचार्य चाणक्य, महामना मदन मोहन मालवीय और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे महान व्यक्तित्व उनके लिए प्रेरणा हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत शिक्षक और मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव तैयार कर सकती है।
‘शिक्षा पर किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुछ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के लोगों को दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते समय पहचान के संकट का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब प्रदेश की छवि बदली है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि शिक्षा में किया गया कोई भी निवेश व्यर्थ नहीं जाता। शिक्षा समाज की आधारशिला है और मजबूत नींव पर ही मजबूत भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
शिक्षकों से मांगी ‘गुरुदक्षिणा’
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि सरकार की ओर से स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा दी जा रही है, लेकिन बदले में उनकी ‘गुरुदक्षिणा’ यही होगी कि वे बच्चों की पढ़ाई और विद्यालय के वातावरण पर पूरा ध्यान दें।
उन्होंने शिक्षकों से स्कूलों को साफ-सुथरा, सुंदर और अनुशासित बनाने तथा हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का आह्वान किया।
12 प्रधानाचार्यों को ‘स्वच्छ हरित विद्यालय’ के लिए सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ और हरित विद्यालयों की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 12 प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया। उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
सम्मानित प्रधानाचार्यों में शामिल हैं:
संभल के कपिल कुमार मालिक, पीलीभीत के मुनीश कुमार, चित्रकूट के हरिशंकर त्रिपाठी, बरेली के राजीव सिंह, बदायूं की संगीता शर्मा, रायबरेली के आशीष प्रताप सिंह, सहारनपुर के संजीव कुमार, श्रावस्ती की केसर जहां, जालौन की वंदन वर्मा, प्रयागराज के जावेद खान, वाराणसी के नागेश कुमार मिश्रा और मेरठ की डॉ. ऋतु दीवान।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर योगी सरकार का बड़ा फोकस
वाराणसी से शुरू हुई इन योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक साथ शिक्षकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और स्कूली बच्चों की बुनियादी जरूरतों पर फोकस किया है।
एक ओर करीब 12 लाख पात्र शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए ₹5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू की गई है, तो दूसरी ओर 1.10 करोड़ बच्चों के अभिभावकों के खातों में ₹1,200 प्रति छात्र की सहायता भेजी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम में साफ संदेश दिया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल स्कूलों का बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की सुरक्षा, बच्चों की जरूरतें, अनुशासन और नकलविहीन परीक्षा व्यवस्था भी जरूरी है।
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