गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व के अवसर पर भारत से सिख श्रद्धालुओं का एक बड़ा जत्था पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब के लिए रवाना हुआ। लेकिन इस धार्मिक यात्रा में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं के साथ पाकिस्तान में भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। मंगलवार (4 नवंबर 2025) को वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने हिंदू श्रद्धालुओं को रोक दिया और उन्हें सीमा पार करने से मना कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीर्थयात्रियों के दस्तावेजों में उनका धर्म स्पष्ट रूप से दर्ज है। ननकाना साहिब जाने वाली बस में चढ़ने से पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने सिख और हिंदू श्रद्धालुओं को अलग किया। इसके बाद हिंदू श्रद्धालुओं को जत्थे से बाहर कर वापस भेज दिया गया।
हिंदू श्रद्धालुओं के एक परिवार ने बताया कि वे अटारी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके पाकिस्तान के वाघा बॉर्डर तक गए थे। सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद उन्होंने विशेष बस के टिकट भी खरीद लिए थे। लेकिन बस में चढ़ने से ठीक पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें रोकते हुए कहा, “तुम हिंदू हो, सिख जत्थे के साथ नहीं जा सकते।” रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों ने अपमानजनक लहजे में यह भी कहा, “अपने मंदिरों में जाओ, सिखों के गुरुद्वारों में क्या लेने जा रहे हो।” श्रद्धालुओं ने कहा कि वे गुरु नानक देव जी को उतनी ही श्रद्धा से पूजते हैं जितनी सिख समुदाय करता है।
पाकिस्तान उच्चायोग ने 10 दिनों की यात्रा के लिए 2,100 से अधिक श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया था, लेकिन केवल 1,796 लोगों को ही सीमा पार करने दी गई। वहीं 300 से अधिक श्रद्धालुओं को वीजा प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण भारतीय सीमा में ही रोक दिया गया।
पाकिस्तान की इस कार्रवाई को हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों समुदायों के बीच फूट डालने की सुनियोजित साजिश के रूप में भी देखा जा रहा है। धार्मिक यात्रा के दौरान इस तरह की रोक को भारत में व्यापक रूप से भेदभावपूर्ण और असंवेदनशील बताया जा रहा है।
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