उत्तर प्रदेश के बरेली में सक्रिय धर्मांतरण गिरोह को लेकर पुलिस ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में सामने आया कि यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर हिंदू युवकों को पहले पैसों और मदद का लालच देता था। इसके बाद उन्हें सुंदर मुस्लिम युवतियों से निकाह का प्रलोभन दिखाकर धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण कराया जाता था। गिरोह की साजिश यह थी कि एक युवक को मुस्लिम बनाने के बाद उसके परिवार को भी धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुभाष नगर के बृजपाल इस गिरोह के शिकार बने। करेली के सलमान और आरिफ नामक युवकों ने उनके एक्सीडेंट के बाद आर्थिक मदद दी और बाद में उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए बहलाया-फुसलाया। अंततः बृजपाल ने धर्मांतरण कर लिया और उनका नाम अब्दुल्ला रख दिया गया। इसके बाद उनकी बहन और माँ का भी धर्मांतरण कराया गया।

इसी तरह, प्रभात, जो मूल रूप से अलीगढ़ का रहने वाला और एक इंटर कॉलेज में शिक्षक था, इस गैंग के जाल में फँस गया। तलाक और मानसिक तनाव के बीच उसे समझाया गया कि इस्लाम अपनाने पर निकाह आसान होगा। कई मुस्लिम लड़कियों की तस्वीरें दिखाकर उसे लुभाया गया और धर्म परिवर्तन के बाद उसका नाम हामिद रखा गया। हालांकि उसकी माँ की सूचना पर उसका जबरन खतना रुक सका।
गिरोह ने इज्जतनगर के एक किशोर को भी फँसाया। उसे पहले नशे की लत लगाई गई और बाद में धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। इस प्रक्रिया में उसकी मानसिक और शारीरिक हालत बेहद खराब हो गई।
पुलिस ने अब्दुल मजीद गिरोह के मोबाइल से कई मुस्लिम युवतियों की तस्वीरें, जाकिर नाइक के वीडियो और पाकिस्तानी स्कॉलर्स के ऑडियो बरामद किए हैं। आरोप है कि इनका इस्तेमाल युवकों का ब्रेनवॉश करने के लिए किया जाता था। गिरोह खासतौर पर दिव्यांग और पिछड़े वर्ग के लड़कों को निशाना बनाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि अब्दुल मजीद की ट्रैवल हिस्ट्री देश के 27 से अधिक जिलों से जुड़ी है और वह जगह-जगह से चंदा इकट्ठा करता था। पुलिस ने उसके बैंक खातों से 13 लाख रुपये बरामद किए हैं और 21 अलग-अलग खातों का खुलासा हुआ है। वहीं, गिरोह के सदस्य सलमान, आरिफ और फहीम अब्दुल मजीद के तहत काम करते थे। सलमान धर्मग्रंथ, सीडी और किताबें उपलब्ध कराता था जबकि आरिफ उसकी मदद करता था।