पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लेते हुए धर्म के आधार पर दिए जाने वाले सभी सरकारी भत्तों और योजनाओं को बंद करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के महज 9 दिन बाद यह निर्णय लिया गया है।
महिला एवं विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 18 मई 2026 को कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि वर्तमान में चल रही सभी धार्मिक आधार वाली आर्थिक सहायता योजनाएं इस महीने के अंत तक जारी रहेंगी, लेकिन 1 जून 2026 से इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इस संबंध में जल्द ही विस्तृत सरकारी नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
सरकार के अनुसार
सूचना एवं संस्कृति विभाग तथा अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत चलाई जा रही धर्म आधारित योजनाओं को समाप्त किया जाएगा। यह कदम राज्य में योजनाओं को धर्मनिरपेक्ष आधार पर लागू करने की दिशा में उठाया गया बताया जा रहा है।
गौरतलब है कि 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने ‘संकल्प पत्र’ में ‘भात नहीं, भत्ता’ के बजाय रोजगार को प्राथमिकता देने का वादा किया था। पार्टी पहले भी इन योजनाओं को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करार देकर विरोध करती रही है।
इससे पहले 21 अगस्त 2023 को ममता बनर्जी सरकार ने इमामों और हिंदू पुजारियों के मासिक भत्ते में ₹500 की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद इमामों को ₹3000 और पुजारियों को ₹1500 प्रति माह मिलने लगे थे। अजान देने वाले मुअज्जिनों को भी ₹1500 मासिक भत्ता दिया जाता था।
हिंदू पुजारियों के लिए भत्ता योजना साल 2020 में शुरू की गई थी, जबकि इमामों और मुअज्जिनों को यह सुविधा पहले से दी जा रही थी। अब नई सरकार के फैसले के बाद इन सभी योजनाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
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