इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को इजरायल का दुनिया में बचा हुआ एकमात्र ताकतवर सहयोगी बताया था। नेतन्याहू ने जवाब देते हुए भारत का विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि इजरायल को अमेरिका के अलावा भी कई देशों तथा लोगों का समर्थन हासिल है।
रविवार, 5 जुलाई 2026 को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि उनके जेडी वेंस के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह उनकी हर बात से सहमत हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के दावे का जवाब देते हुए उन्होंने भारत को इजरायल के लिए मिल रहे बड़े वैश्विक समर्थन के प्रमुख उदाहरण के रूप में पेश किया।
‘भारत नाम का एक छोटा-सा देश, जहां 1.4 अरब लोग हैं’
जेडी वेंस के बयान का जवाब देते हुए नेतन्याहू ने व्यंग्यात्मक अंदाज में भारत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इजरायल के कुछ और दोस्त भी हैं और उदाहरण के तौर पर “भारत नाम के एक छोटे-से देश” का जिक्र किया, जिसकी आबादी 1.4 अरब है।
इसके बाद नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल को भारत में जबरदस्त समर्थन मिलता है। उनके बयान का आशय भारत को वास्तव में छोटा देश बताना नहीं था, बल्कि 1.4 अरब आबादी वाले विशाल देश का हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में जिक्र करना था।
‘भारत से हमें जबरदस्त समर्थन मिलता है’
नेतन्याहू ने भारत से मिलने वाले समर्थन की खुलकर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि भारत की आबादी करीब 1.4 अरब है और वहां से इजरायल को जबरदस्त समर्थन मिलता है। इजरायली प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स की ओर से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं का भी उल्लेख किया।
इस बयान को भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नेतन्याहू ने अमेरिका के अलावा इजरायल के दूसरे दोस्तों का उदाहरण देते हुए सबसे प्रमुख रूप से भारत का नाम लिया।
फेसबुक पर भारतीयों से मिल रहे समर्थन का किया जिक्र
इजरायली प्रधानमंत्री ने अपने फेसबुक अकाउंट पर भारत से मिलने वाले समर्थन की भी बात कही।
नेतन्याहू ने कहा कि उनके फेसबुक पेज पर भारत से समर्थन के संदेशों की बाढ़ आई हुई है। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स इजरायल के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
उन्होंने इस सोशल मीडिया समर्थन का उदाहरण देकर जेडी वेंस के उस दावे का विरोध किया कि इजरायल दुनिया में लगभग अकेला पड़ चुका है और उसके पास अमेरिका के अलावा कोई अन्य ताकतवर दोस्त नहीं बचा है।
जेडी वेंस से बोले नेतन्याहू- हर बात से सहमत होना जरूरी नहीं
नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ व्यक्तिगत या राजनीतिक संबंध खराब होने की बात से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि वह वेंस का सम्मान करते हैं और दोनों के बीच अच्छे संबंध हैं, लेकिन अच्छे रिश्ते होने का अर्थ हर मुद्दे पर सहमत होना नहीं है।
नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी तारीफ की और उन्हें इजरायल के लिए व्हाइट हाउस में अब तक का सबसे बड़ा मित्र बताया। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि अमेरिका इजरायल का महत्वपूर्ण और विशिष्ट सहयोगी जरूर है, लेकिन दुनिया में इजरायल का अकेला दोस्त नहीं है।
आखिर जेडी वेंस ने क्या कहा था?
इस विवाद की शुरुआत अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के जून 2026 में दिए गए एक बयान से हुई थी। 18 जून 2026 को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान वेंस ने इजरायली नेतृत्व को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी ईरान नीति की आलोचना करने को लेकर चेतावनी दी थी।
वेंस ने कहा था कि यदि वह इजरायली सरकार की कैबिनेट में होते तो दुनिया में बचे अपने एकमात्र ताकतवर सहयोगी पर हमला या उसकी सार्वजनिक आलोचना नहीं करते। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उस समय डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं, जो इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते पर बढ़ी थी तनातनी
जेडी वेंस की टिप्पणी अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर बढ़ते मतभेदों की पृष्ठभूमि में आई थी।
अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते और आगे की शांति प्रक्रिया को लेकर इजरायली नेतृत्व के कुछ हिस्सों ने असंतोष जताया था। वेंस ने इसी आलोचना के जवाब में इजरायल को अमेरिका के समर्थन की याद दिलाई थी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इजरायली नेताओं से कहा था कि उन्हें अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। वाशिंगटन का तर्क रहा है कि समझौते का उद्देश्य संघर्ष को कम करना और व्यापक क्षेत्रीय वार्ता के लिए रास्ता तैयार करना है।
इजरायल के लेबनान ऑपरेशन पर भी अमेरिका की नाराजगी
अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव केवल ईरान समझौते तक सीमित नहीं है।
लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भी दोनों सहयोगियों के बीच मतभेद सामने आए हैं। अमेरिकी पक्ष ने चिंता जताई है कि हिंसा बढ़ने से ईरान के साथ चल रही संवेदनशील कूटनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वेंस ने कहा था कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन उसे ऐसी शांति प्रक्रिया का भी सम्मान करना चाहिए, जो पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
‘इजरायल के कई दोस्त हैं’
नेतन्याहू ने वेंस के बयान को खारिज करते हुए कहा कि इजरायल के दुनिया में कई दोस्त हैं।
उनके मुताबिक, विभिन्न देशों के कई नेता सार्वजनिक रूप से इजरायल का खुला समर्थन नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें अपने देश में जनमत और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
हालांकि निजी बातचीत में ऐसे नेता इजरायल के साथ संबंध, समझौते और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताते हैं। नेतन्याहू ने दावा किया कि कई देश इजरायल की सैन्य क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहते हैं।
‘जनमत की समस्या है, लेकिन हम आपका सम्मान करते हैं’
नेतन्याहू ने दावा किया कि कई देशों के नेता उन्हें फोन करते हैं और बताते हैं कि अपने घरेलू जनमत के कारण वे खुलकर इजरायल का समर्थन नहीं कर सकते। उनके मुताबिक, ऐसे नेता इजरायल के साथ समझौते करना चाहते हैं और उसकी सैन्य तकनीक, AI तथा साइबर विशेषज्ञता से सीखने की इच्छा रखते हैं।
इजरायली प्रधानमंत्री का कहना था कि दुनिया में इजरायल के वास्तविक संबंध सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली तस्वीर से कहीं अधिक व्यापक हैं।
AI और साइबर ताकत का भी किया जिक्र
नेतन्याहू ने इजरायल की तकनीकी क्षमता को उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने दावा किया कि साइबर क्षेत्र में इजरायल दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है और कई देश इजरायली टेक्नोलॉजी तथा साइबर विशेषज्ञता में रुचि रखते हैं।
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की तकनीकी क्षमताओं के कारण अनेक देश उससे संबंध बनाए रखना और सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। इसलिए उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय संबंधों की वास्तविक स्थिति वैसी नहीं है, जैसी बाहर से दिखाई देती है।
भारत का नाम लेना क्यों महत्वपूर्ण?
जेडी वेंस को जवाब देते समय नेतन्याहू द्वारा विशेष रूप से भारत का नाम लेना राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उनके सामने सवाल यह था कि क्या अमेरिका दुनिया में इजरायल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी रह गया है। इसके जवाब में उन्होंने सबसे पहले भारत के 1.4 अरब लोगों और वहां से मिलने वाले समर्थन का उल्लेख किया।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच इजरायल अपने वैश्विक समर्थकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का संदेश देना चाहता है। यह एक विश्लेषण है, जिसका आधार नेतन्याहू द्वारा अमेरिका के अलावा भारत और अन्य देशों का विशेष उल्लेख करना है।
अमेरिका से मतभेद, लेकिन रिश्ते टूटने से इनकार
ईरान और लेबनान को लेकर मतभेदों के बावजूद नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ संबंधों में किसी बड़े टूटाव की बात को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का बेहद करीबी मित्र बताया और कहा कि अमेरिका के साथ इजरायल का संबंध विशेष बना हुआ है।
साथ ही, उन्होंने जेडी वेंस के इस आकलन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि अमेरिका के अलावा इजरायल का कोई महत्वपूर्ण सहयोगी नहीं है।
नेतन्याहू का स्पष्ट संदेश था कि वाशिंगटन इजरायल का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी हो सकता है, लेकिन इजरायल के वैश्विक दोस्त केवल अमेरिका तक सीमित नहीं हैं।
भारत के समर्थन को नेतन्याहू ने बनाया जवाब का केंद्र
पूरे इंटरव्यू की सबसे चर्चित बात भारत का उल्लेख रहा। नेतन्याहू ने भारत की विशाल आबादी, सोशल मीडिया पर मिल रहे समर्थन और इजरायल के अन्य वैश्विक संबंधों का जिक्र करके जेडी वेंस के बयान को चुनौती दी।
उनका बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका-इजरायल संबंधों में ईरान शांति प्रक्रिया और लेबनान में सैन्य अभियान को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। ऐसे में भारत को इजरायल के महत्वपूर्ण समर्थकों में गिनाने वाला नेतन्याहू का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
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