14 अप्रैल को भारत सहित पूरे विश्व में डॉ. भीमराव आंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है, आंबेडकर की जयंती बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यह दिन सामाजिक समानता, न्याय और मानवाधिकारों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता और एक महान समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने जीवनभर जातिगत भेदभाव और असमानता के खिलाफ संघर्ष किया और एक समान समाज की स्थापना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इतिहास के अनुसार, पहली बार आंबेडकर जयंती 14 अप्रैल 1928 को पुणे में उनके अनुयायी सदाशिव रणपिसे द्वारा मनाई गई थी। इसके बाद यह परंपरा पूरे देश में फैल गई और आज यह एक वैश्विक स्तर पर मनाया जाने वाला दिवस बन चुका है।
Tributes to Dr. Babasaheb Ambedkar on his birth anniversary. His efforts towards nation building are deeply motivating. His life and work continue to inspire generations to build a just and progressive society. pic.twitter.com/MWHUTlpf9Y
— Narendra Modi (@narendramodi) April 14, 2026
आंबेडकर जयंती के अवसर पर देशभर में उनके जन्मस्थल डॉ. आंबेडकर नगर (मध्य प्रदेश), दीक्षाभूमि नागपुर और चैत्यभूमि मुंबई सहित कई प्रमुख स्थलों पर लाखों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित होते हैं। सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और बौद्ध विहारों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस अवसर पर रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण प्रतियोगिताएं, निबंध लेखन, और समाज सुधार से जुड़े आयोजन किए जाते हैं। कई राज्यों में इस दिन सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी डॉ. आंबेडकर को सम्मान मिला है। 2015 में गूगल ने उनकी 124वीं जयंती पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। वहीं संयुक्त राष्ट्र में भी उनकी जयंती मनाई गई, जहां उन्हें “विश्व का प्रणेता” कहा गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई नेताओं ने भी इस अवसर पर डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया।
डॉ. भीमराव आंबेडकर का जीवन आज भी करोड़ों लोगों को समानता, शिक्षा और अधिकारों के लिए प्रेरित करता है।
दो शब्दों संदेश के
B. R. Ambedkar की जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि “समानता, न्याय और सामाजिक परिवर्तन” के मूल्यों को याद करने का अवसर है।
- उनका जीवन संघर्ष यह संदेश देता है कि शिक्षा और ज्ञान के माध्यम से सामाजिक भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है।
- संविधान निर्माण में उनका योगदान भारत को एक लोकतांत्रिक और न्यायपूर्ण राष्ट्र बनाने की नींव है।
- देश और दुनिया में उनकी जयंती मनाना यह दर्शाता है कि उनके विचार आज भी मानवाधिकार और समानता के लिए प्रासंगिक हैं।
“आंबेडकर जयंती हमें यह प्रेरणा देती है कि एक समान, शिक्षित और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण ही सच्ची श्रद्धांजलि है।”
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